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एक शाम आलम अंसारी के नाम

न्यूज़ रिपोर्ट
“एक शाम आलम अंसारी के नाम” — तीसरी बरसी पर श्रद्धांजलि सभा का भावपूर्ण एवं गरिमामय आयोजन
पहाड़गंज के नबी करीम क्षेत्र में समाजसेवी स्वर्गीय आलम अंसारी साहब की तीसरी बरसी के अवसर पर एक भव्य, गरिमामय एवं अत्यंत भावनात्मक श्रद्धांजलि सभा “एक शाम आलम अंसारी के नाम” का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वर्गीय आलम अंसारी साहब के सामाजिक जीवन, मानवता के प्रति उनके समर्पण और उनके द्वारा किए गए निस्वार्थ सेवा कार्यों को स्मरण करना था। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों, संगठनों और विचारधाराओं से जुड़े लोगों ने एकजुट होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे यह आयोजन सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का जीवंत उदाहरण बन गया।
इस श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता बिहार समाज के वरिष्ठ नेता साबिर हुसैन ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि आलम अंसारी साहब का जीवन समाज के लिए एक खुली किताब की तरह था, जिसमें सेवा, सादगी और इंसानियत के मूल्य स्पष्ट रूप से झलकते थे। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग बहुत कम होते हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के समाज के हर वर्ग के लिए खड़े रहते हैं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों के रूप में हाफिज अंसार साहब, अलाउद्दीन बिल्डर साहब, महेश सिंनंदी उर्फ तोता भाई, नसीम खलीफा, मुफ़्ती अताउर रहमान साहब, मौलाना सुब्हान, शकील अहमद रहमानी साहब (सीनियर पत्रकार), मोहम्मद मुर्शीद, वसीम अंसारी, अरमान अंसारी, आजाद अंसारी, लाल मोहम्मद, मोहम्मद तहसीन, मोहम्मद एजाज सहित अनेक गणमान्य अतिथि, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, युवजन, बुजुर्ग, समाजसेवी एवं शुभचिंतक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने स्वर्गीय आलम अंसारी साहब के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि आलम अंसारी साहब नबी करीम क्षेत्र में आने वाले उन शुरुआती व्यक्तियों में से थे, जिन्होंने सामाजिक एकता और इंसानियत को अपनी जीवनशैली का आधार बनाया। उन्होंने कभी धर्म, जाति या समुदाय के नाम पर भेदभाव नहीं किया। उनके लिए हर जरूरतमंद व्यक्ति सिर्फ इंसान था—चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान, गरीब हो या मजबूर।
वक्ताओं ने यह भी बताया कि आलम अंसारी साहब हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे रहते थे। किसी की बीमारी हो, किसी की आर्थिक परेशानी हो या किसी को सामाजिक सहारे की जरूरत हो—वे हर मौके पर खामोशी से मदद कर देते थे, बिना किसी दिखावे के। यही कारण है कि आज भी लोग उन्हें सिर्फ एक समाजसेवी नहीं, बल्कि एक नेकदिल इंसान के रूप में याद करते हैं।
अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि आलम अंसारी साहब की सादगी, ईमानदारी और सेवा-भाव आज की युवा पीढ़ी के लिए एक मजबूत प्रेरणा है। उनके द्वारा किए गए कार्य केवल यादें नहीं, बल्कि समाज के लिए एक दिशा हैं। कार्यक्रम में मौजूद हर राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक पृष्ठभूमि से आए लोगों ने एक स्वर में उनकी प्रशंसा की और उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का संचालन स्वर्गीय आलम अंसारी साहब के पुत्र इंकलाब अंसारी एवं आजाद अंसारी ने संयुक्त रूप से किया। दोनों ने अत्यंत संयमित, सधे हुए और भावनात्मक अंदाज़ में कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। उन्होंने अपने पिता से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि उनके पिता ने उन्हें हमेशा इंसानियत, सच्चाई और समाज सेवा का रास्ता दिखाया। उन्होंने उपस्थित सभी अतिथियों, वक्ताओं और आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके पिता की सोच और मिशन को आगे बढ़ाना ही उनके लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है।
कार्यक्रम का समापन दुआ और मौन के साथ किया गया। सभी उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय आलम अंसारी साहब की आत्मा की शांति के लिए दुआ की और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। यह श्रद्धांजलि सभा न केवल एक स्मृति कार्यक्रम रही, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे, इंसानियत और सेवा के संदेश को और मजबूत करने वाला एक प्रेरणादायी आयोजन साबित हुई।

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