
वंदे मातरम्’ को मिला कानूनी कवच, अपमान पर 3 साल तक की जेल
लोकसभा और राज्यसभा से पारित हुआ वंदे मातरम् विधेयक
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून
सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान से पहले गूंजेगा राष्ट्रीय गीत
वीना टंडन
नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को अब राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ की तरह कानूनी संरक्षण मिलने का रास्ता साफ हो गया है। राज्यसभा के बाद गुरुवार को लोकसभा ने भी वंदे मातरम् विधेयक को मंजूरी दे दी। विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार दोनों सदनों से विधेयक पारित कराने में सफल रही। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा।
नए कानून के लागू होने के बाद वंदे मातरम् का अपमान करना दंडनीय अपराध होगा। यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय गीत गाए जाने के दौरान बाधा डालता है या किसी को इसे गाने से रोकता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। फिलहाल यही प्रावधान राष्ट्रगान के अपमान के मामलों में लागू है।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 24 जुलाई को राज्यसभा में यह विधेयक पेश किया था। सरकार का कहना है कि वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणास्रोत रहा है और इसकी गरिमा की रक्षा के लिए कानूनी संरक्षण आवश्यक है।
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के सभी छह छंद गाए जाएंगे। इसके साथ ही गृह मंत्रालय के निर्देश के अनुरूप जिन कार्यक्रमों में राष्ट्रगान बजाया जाता है, वहां राष्ट्रगान से पहले वंदे मातरम् का गायन भी सुनिश्चित किया जाएगा। इससे राष्ट्रीय गीत को आधिकारिक आयोजनों में अधिक सम्मान और प्रमुख स्थान मिलेगा।




