
लू से जंग… सरकार का ‘कूल प्लान’ तैयार, बच्चों-श्रमिकों को मिलेगा सुरक्षा कवच
वीना टंडन
नई दिल्ली। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच दिल्ली सरकार ने इस बार हीट वेव से निपटने के लिए अपनी रणनीति को और अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि स्कूली बच्चों और निर्माण स्थलों पर काम कर रहे श्रमिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं। इसके साथ ही पशु-पक्षियों तक पानी पहुंचाने और हीट वेव पीड़ितों के लिए विशेष टीमों की तैनाती के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
सरकार ने स्कूली बच्चों को लू और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए अहम कदम उठाया है। जरूरत पड़ने पर बच्चों को छुट्टी से पहले ओआरएस का घोल पिलाकर ही घर भेजा जाएगा, ताकि रास्ते में उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। वहीं, निर्माण स्थलों पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। कार्यस्थलों पर पानी की पर्याप्त व्यवस्था के साथ धूप से बचाव के लिए टोपी और गमछे दिए जाएंगे। अत्यधिक गर्मी की स्थिति में दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक बाहरी कार्यों पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्देश दिया गया है और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने पावर सप्लाई को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में 40 दिनों तक तापमान 40 डिग्री से ऊपर रहने का ट्रेंड सामने आया है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार पीक पावर डिमांड 9,000 मेगावाट के पार जाने का अनुमान है, जो पिछले साल के 8,442 मेगावाट से काफी ज्यादा है। मुख्यमंत्री ने बिजली कंपनियों को साफ निर्देश दिए हैं कि किसी भी हालत में बिजली कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
‘कूल रूफ पॉलिसी 2026’ के तहत भी अहम कदम उठाए गए हैं। कश्मीरी गेट अंतरराज्यीय बस अड्डे की छतों पर करीब 28,674 वर्ग फुट में रिफ्लेक्टिव कोटिंग का काम पूरा किया गया है, जिससे अंदर का तापमान कम रखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा सभी 13 जिलों में 339 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है और 30 से अधिक अस्पतालों में 5-बेड वाले विशेष ‘कूल रूम’ तैयार किए गए हैं।
सरकार का कहना है कि इस बार हीट वेव से निपटने के लिए हर स्तर पर तैयारी की गई है, ताकि लोगों को राहत मिल सके और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

