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मौलाना अरशद मदनी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के ‘घर वापसी’ बयान की निंदा की

वीना टंडन
नई दिल्ली: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के ‘घर वापसी’ वाले बयान और जनसंख्या रुझनों को लेकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की बयानबाजी नफरत फैलाने और भारत के संवैधानिक मूल्यों को खतरे में डालने वाली है।
‘घर वापसी’ वाला बयान चिंताजनक
मौलाना मदनी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक पोस्ट में लिखा कि 20 करोड़ मुसलमानों के लिए ‘घर वापसी’ आयोजित करने का बयान पिछले 70 सालों में अभूतपूर्व और बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा, “कोई भी आवाज जो देश को बर्बादी, अशांति और आपसी दुश्मनी की ओर ले जाती है, वह राष्ट्र के प्रति निष्ठा की आवाज नहीं हो सकती।”
देश में बढ़ती हिंसा और हत्या का माहौल
मदनी ने आरोप लगाया कि देश में हत्या और हिंसा का माहौल व्याप्त है। उन्होंने गौ संरक्षण के नाम पर हुई लिंचिंग और हत्याओं की घटनाओं का जिक्र किया। मदनी ने कहा कि ऐसी घटनाओं के बावजूद सरकार चुप है, जबकि कुछ लोग दावा करते रहते हैं कि भारत में केवल एक विशेष विचारधारा के अनुयायी ही जीने का अधिकार रखते हैं। उन्होंने इसे भारतीय संविधान का स्पष्ट उल्लंघन बताया और कहा कि यह देश की एकता और शांति के लिए गंभीर खतरा है।
धर्म के नाम पर हिंसा को अस्वीकार
मौलाना मदनी ने दोहराया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद हमेशा सांप्रदायिक और नफरत फैलाने वाली विचारधाराओं का विरोध करती रही है। उन्होंने कहा कि मुसलमान अपने धर्म के बल पर जीवित हैं और जीवित रहेंगे। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में शांति और सद्भाव केवल धर्मनिरपेक्ष संवैधानिक ढांचे के तहत ही संभव है। धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की हिंसा को उचित नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि सभी धर्म मानवता, सहिष्णुता, प्रेम और एकता का उपदेश देते हैं।
धर्म का गलत इस्तेमाल करने वालों की निंदा जरूरी
मदनी ने कहा कि जो लोग धर्म का इस्तेमाल नफरत और हिंसा फैलाने के लिए करते हैं, वे अपने धर्म के सच्चे अनुयायी नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की हर स्तर पर निंदा और विरोध करना चाहिए। उनकी ये टिप्पणियाँ मोहन भागवत के लखनऊ के सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित सामाजिक सद्भाव सभा को संबोधित करने के एक दिन बाद आई हैं।
भागवत ने हिंदू समाज में एकता का आह्वान किया
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में हिंदू समाज में एकता बनाए रखने और सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी से कोई खतरा नहीं है। एक विज्ञप्ति के अनुसार, भागवत ने ‘घर वापसी’ की प्रक्रिया में तेजी लाने और हिंदू धर्म में लौटने वाले लोगों की देखभाल सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

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