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भारतीय बौद्ध संघ ने मनाया “संविधान दिवस”

वीना टंडन
नई दिल्ली, 26 नवम्बर 2025: पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेताौ मुख्तार अब्बास नकवी ने आज यहाँ कहा कि आजादी का अमृत काल, समान नागरिक कानून पर संवैधानिक दिशानिर्देश को अंगीकार करने का अवसर है, समान नागरिक कानून, सम्पूर्ण मुल्क के लिए है, किसी मजहब के लिए नहीं। “एक कंट्री, एक क़ानून” देश की ज़रूरत है।

मुख्तार अब्बास नकवी ने आज यहां “संविधान दिवस” के अवसर पर भारत मंडपम में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारत में पंथनिरपेक्षता बहुसंख्यक समाज के संकल्प, सोंच और संस्कार का नतीजा है। बंटवारे के बाद हिन्दुस्तान के हिन्दू बहुसंख्यकों ने पंथनिरपेक्षता का रास्ता चुना, वहीँ मुस्लिम बहुसंख्यक पाकिस्तान ने इस्लामी राष्ट्र का झंडा फहराया। भारतीय संविधान की समावेशी, सर्वस्पर्शी सोंच बहुसंख्यकों के संस्कार, संकल्प, संस्कृति का नतीजा है।
नकवी ने कहा कि 26 नवम्बर 1949 को अपनाए गए भारतीय संविधान की जनतांत्रिक, लोकतांत्रिक, पंथनिरपेक्ष भावना आज भी सशक्त और सुरक्षित है। जबकि दूसरी ओर उसी दौरान बने इस्लामी देश पाकिस्तान का संविधान 1956 में निरस्त हुआ, 1962 में नया संविधान बना, 1969 में निलंबित और 1973 में फिर नया संविधान बना, यह इस्लामी देश कभी संसदीय प्रणाली तो कभी राष्ट्रपति प्रणाली के बीच संवैधानिक अनिश्चिता, विरोधाभास और तानाशाही अव्यवस्था के बीच 25 करोड़ आबादी का पाकिस्तान कट्टरता के कबाड़खाने में कैद रहा है। वहीं 145 करोड़ आबादी वाला हिन्दुस्तान दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बेहतरीन, बेमिसाल संविधान से मजबूत और महफूज़ है और आगे भी रहेगा।
मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोग हाथ में संविधान लेकर समाज में भय-भ्रम का भौकाल और “काल्पनिक कन्फ्यूजन की क्रिमिनल करतूत” में जुटे हैं। “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को अराजकता और उद्दंडता का सर्टिफिकेट” समझने वाले “सामन्ती सुल्तानों की सनक-साज़िश” से सावधान रहना होगा। भारत में संवैधानिक प्रतिबद्धता का अमृत काल चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विभिन्न संवैधानिक सुधारों के जरिए समावेशी सशक्तिकरण के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है और आगे ही बढ़ता रहेगा।
मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, शैक्षणिक, प्रशासनिक, कृषि, स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों में सुधार ने भारत को संवैधानिक प्रतिबद्धता से भरपूर सुशासन का प्रमाणित वैश्विक ब्रांड बना दिया है।
नकवी ने कहा कि “संवैधानिक लॉ की साम्प्रदायिक लिंचिंग” की सनक, साज़िश के जरिए संविधान के मूल्यों, मर्यादाओं के खिलाफ आपराधिक अराजकता लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ साज़िश है। सभी संवैधानिक सुधार, धार्मिक आस्था के संरक्षण, प्रशासनिक व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के संकल्प के साथ हो रहे हैं।
नकवी ने संवैधानिक सुधार पर सांप्रदायिक प्रहार कर रहे लोगों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “काल्पनिक कन्फ्यूजन कुंड में कैद झुंड” की संविधान की धाक-धमक को धूमिल करने की धूर्ततापूर्ण धुन को धूलधूसरित करना होगा।
नकवी ने कहा कि छद्म सेक्युलर सिंडिकेट “संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता को सनातन धर्म की उपेक्षा” का हथियार बना संविधान, समाज और सनातन के खिलाफ कम्युनल क्रिमिनल कांस्पीरेसी करने में जुटा है, ऐसे साम्प्रदायिक संक्रमण से सावधान रहना होगा।
नकवी ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की मूल संवैधानिक भावना और समावेशी सोंच को सशक्त करने के लिए कॉमन सिविल कोड मुल्क, मज़हब, मानवता की जरूरत है। संवैधानिक-समावेशी सुधार पर सांप्रदायिक प्रहार करने वाले न तो मुल्क के हितैषी हैं न किसी मज़हब के। भय-भ्रम के गटर पर भरोसे का शटर लगा कर, संविधान की ताक़त को साज़िशी आफ़त से बचाना हमारा राष्ट्रीय कर्त्तव्य है।
इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा संसदीय बोर्ड के सदस्य डा. सत्यनारायण जटिया, वीएचपी (इंद्रप्रस्थ) दिल्ली के अध्यक्ष कपिल खन्ना, सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा, उपाध्यक्ष उत्तराखंड समाज कल्याण योजनाएं श्री देशराज कर्णवाल, भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष श्री लाल सिंह आर्य, भारतीय बौद्ध संघ के अध्यक्ष भंते संघप्रिय राहुल एवं अन्य गणमान्य जनों की गरिमामई उपस्थिति रही।

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