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दिल्ली के भूजल में बढ़ता यूरेनियम संकट: नर्वस सिस्टम पर घातक असर, विशेषज्ञों ने दी ‘साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी’ की चेतावनी

वीना टंडन
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में भूजल लगातार जहरीला होता जा रहा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड-2025 की ताज़ा रिपोर्ट ने सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता को बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार राजधानी के 103 भूजल नमूनों में से 12.63 प्रतिशत में यूरेनियम की मात्रा सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक पाई गई है। यानी हर आठ में से एक नमूना पीने योग्य नहीं है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति सिर्फ किडनी ही नहीं, बल्कि पूरे नर्वस सिस्टम, दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित कर रही है।

नर्वस सिस्टम पर सीधा हमला

चिकित्सकों के अनुसार दूषित पानी का लंबे समय तक सेवन नर्व सिग्नलिंग को बाधित करता है, जिससे मानसिक कार्यप्रणाली में गिरावट आने लगती है।
एम्स के इंटरनल मेडिसिन विभाग के डॉ. हर्षल आर. साल्वे बताते हैं कि यूरेनियम की अधिकता से होने वाली न्यूरो-टॉक्सिसिटी सीखने की क्षमता को घटा देती है, याददाश्त कमजोर करती है और मूड डिसऑर्डर का प्रमुख कारण बन जाती है।

उनके मुताबिक यह समस्या दिल्ली जैसे प्रदूषण-प्रभावित महानगर में मानसिक स्वास्थ्य संकट को और गंभीर रूप देती जा रही है।

दिल्ली के कई इलाकों में हालात गंभीर

रिपोर्ट के अनुसार उत्तरी दिल्ली, उत्तर-पश्चिमी, पश्चिमी दिल्ली, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली, रोहिणी, भलस्वा झील क्षेत्र और नांगली राजपुरा में यूरेनियम का स्तर सुरक्षित सीमा से बहुत अधिक पाया गया है।
विशेषज्ञों ने चेताया है कि अगर तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह स्थिति दिल्ली में ‘साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी’ का रूप ले सकती है।

दिमागी कार्यक्षमता कमजोर, नींद में गड़बड़ी बढ़ी

एम्स पलमोनरी मेडिसिन के प्रमुख प्रो. डॉ. अनंत मोहन के अनुसार यूरेनियम किडनी पर प्रभाव डालने के बाद सीधे दिमागी कोशिकाओं को कमजोर करता है।
वे बताते हैं कि इससे

ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई

चिड़चिड़ापन

नींद में गड़बड़ी

मानसिक थकान
की समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं।
बच्चे और बुजुर्ग इससे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

आरओ का इस्तेमाल जरूरी, हैंडपंप का पानी न पिएं

दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ लीटर पेयजल की खपत होती है, जिसमें 10–13 प्रतिशत हिस्सा भूजल का है। विशेषज्ञों ने अपील की है कि जिन इलाकों में यूरेनियम की मात्रा अधिक है, वहां लोग आरओ आधारित फिल्टर का ही इस्तेमाल करें और बच्चों को हैंडपंप-बोरवेल का पानी बिल्कुल न पिलाएं।

साथ ही भूजल गुणवत्ता की नियमित निगरानी और वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है।

धीमा ज़हर, साइलेंट किलर

यूरेनियम को विशेषज्ञ ‘धीमा ज़हर’ कहते हैं, क्योंकि यह शरीर में बिना तत्काल लक्षण के जमा होता रहता है और धीरे-धीरे गुर्दे, हड्डियां, लीवर और दिमाग को नुकसान पहुंचाता है।

कितनी है सुरक्षित सीमा?

भारत में पेयजल में यूरेनियम की सुरक्षित सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर (30 PPB) तय की गई है। रिपोर्ट में दिल्ली के कई इलाकों में इसका स्तर 59 PPB तक पहुंच गया, जो चिंताजनक है।

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