
इस बार नौ नहीं दस दिन चलेगा नवरात्र जाने दुर्गा की पूजा स्थापना विधि व मुहुर्त
स्टार न्यूज़ टेलीविजन
बुलबुल पाण्डेय
गाजीपुर:साल शारदीय नवरात्र में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है, लेकिन इस बार कैलेंडर देखकर आपको एक दिन ज्यादा नजर आ सकता है। साल 2026 के शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर तक चलेंगे।यानी इस बार नवरात्र का पर्व कुल 10 दिनों का माना जा रहा है। इसके पीछे वजह किसी पूजा में बदलाव नहीं, बल्कि अष्टमी तिथि की वृद्धि है।
इस बार अष्टमी का प्रभाव दो दिनों तक रहने के कारण नवरात्र की अवधि बढ़ रही है। 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के साथ माता की पूजा शुरू होगी, 18 अक्टूबर को महाअष्टमी का व्रत रखा जाएगा और 20 अक्टूबर को नवमी के बाद विजयादशमी मनाई जाएगी। इस बार माता के आगमन और विदाई की सवारी भी खास मानी जा रही है।
*11 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्र*
शारदीय नवरात्र की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर को आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होगी। इस दिन घरों और पूजा स्थलों पर कलश स्थापना की जाएगी और मां दुर्गा के पहले स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा होगी। उत्थान ज्योतिष एवं आध्यात्म संस्थान के निदेशक पं. उमाकांत पाठक के अनुसार प्रतिपदा तिथि सूर्योदय से शुरू होकर रात 8 बजकर 37 मिनट तक रहेगी।
*कलश स्थापना का शुभ समय*
इस बार कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। 11 अक्टूबर को चित्रा नक्षत्र भी रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार चित्रा नक्षत्र में कलश स्थापना से बचने की परंपरा है। इसलिए श्रद्धालु अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना कर सकते हैं।
*इस बार 10 दिन के नवरात्र क्यों?*
आमतौर पर शारदीय नवरात्र को नौ दिनों का पर्व माना जाता है, लेकिन 2026 में अष्टमी तिथि की वृद्धि हो रही है। इसी वजह से नवरात्र 11 से 20 अक्टूबर तक यानी 10 दिनों के माने जा रहे हैं। पं. उमाकांत पाठक के मुताबिक सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर को रहेगी। यह सूर्योदय से पहले शुरू होकर शाम 5 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। इसी दिन कई पूजा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी।
*महाअष्टमी का व्रत कब?*
इस साल महाअष्टमी का व्रत 18 अक्टूबर को रखा जाएगा। इसी दिन निशा पूजा भी की जाएगी। अष्टमी तिथि बढ़ने के कारण इसका प्रभाव दो दिनों में रहेगा। महाअष्टमी व्रत रखने वाले श्रद्धालु 19 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 55 मिनट के बाद व्रत का पारण कर सकेंगे।
*कन्या पूजन का समय*
नवरात्र में अष्टमी और नवमी के आसपास कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार नवमी तिथि में कन्या पूजन 19 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 55 मिनट के बाद किया जा सकेगा। इसके अलावा 20 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 35 मिनट से पहले तक भी कन्या पूजन किया जा सकता है।
नवमी तिथि 20 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि शुरू हो जाएगी और नवरात्र व्रत का पारण किया जा सकेगा।
*20 अक्टूबर को ही विजयादशमी*
20 अक्टूबर को सुबह नवमी रहने के बाद दशमी तिथि शुरू होगी। दोपहर के समय श्रवण नक्षत्र से युक्त दशमी मिलने के कारण इसी दिन विजयादशमी यानी दशहरा भी मनाया जाएगा। इस तरह 11 अक्टूबर को कलश स्थापना से शुरू हुआ शारदीय नवरात्र 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ पूरा होगा।
*हाथी पर आएंगी माता शेर वाहिनी*
इस बार माता का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में हाथी पर माता के आगमन को शुभ संकेत और सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
वहीं माता की विदाई यानी गमन मुर्गे पर माना जा रहा है। परंपरागत मान्यताओं में मुर्गे पर गमन को अशांति से जोड़कर देखा जाता है। ये बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं और अलग-अलग पंचांग तथा परंपराओं में इनमें अंतर हो सकता है।






