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दिल में छेद से जूझ रही मासूम लविश्का को मिला नया जीवन, वरदान बना ‘राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य विभाग ‘

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आगरा (18 अगस्त 2026): आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक बेबस पिता के आंसुओं को ‘राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम’ (RBSK) ने मुस्कान में बदल दिया। विकास खंड अछनेरा के ग्राम साधन निवासी गजेंद्र पाल सिंह की नन्हीं बेटी लविश्का के दिल में जन्मजात छेद था। निजी अस्पतालों के भारी खर्च के आगे लाचार पिता को जब कोई राह नहीं सूझ रही थी, तब स्वास्थ्य विभाग की आरबीएसके टीम उनके लिए देवदूत बनकर सामने आई।

आशा कार्यकर्ता की सूचना पर अछनेरा ब्लॉक की टीम-बी (डॉ. लता मिश्रा, डॉ. दीप्ति बरूण, संतोष कुमार व अनीता कौशिक) ने गांव पहुंचकर बच्ची की जांच की और परिजनों को योजना की जानकारी दी। इसके बाद डीईआईसी मैनेजर रमाकान्त शर्मा के समन्वय से बच्ची को जेएन मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग में संदर्भित किया गया, जहां 30 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बच्ची की सफल ओपन हार्ट सर्जरी की।

इलाज और दवाइयों का पूरा खर्च सरकार ने उठाया। बच्ची के पिता गजेंद्र पाल सिंह ने भावुक होकर स्वास्थ्य विभाग का आभार जताया और कहा कि इस योजना ने उनकी बेटी को नई जिंदगी दी है।

क्या है राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK)?

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संचालित इस योजना का उद्देश्य जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में 4 मुख्य श्रेणियों (जन्मजात दोष, कमियां, बीमारियां और विकास में देरी व दिव्यांगता) की 47 गंभीर बीमारियों की मुफ्त जांच व शत-प्रतिशत इलाज उपलब्ध कराना है।

2 वर्षों में 228 बच्चों का हुआ सफल उपचार:

जनपद आगरा में आरबीएसके के तहत वर्ष 2025-26 में 152 और वर्ष 2026-27 में अब तक 76 गंभीर पीड़ित बच्चों का सफल इलाज कराया जा चुका है।

अधिकारियों के वक्तव्य:

आरबीएसके योजना के तहत 47 बीमारियों की जांच, संपूर्ण उपचार और दवाइयों का पूरा खर्च सरकार उठाती है।”

डॉ. अरुण श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), आगरा

 

“समर्पित टीमें स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर लगातार स्क्रीनिंग करती हैं और चिन्हित बच्चों को उच्च चिकित्सा केंद्रों में संदर्भित कराती हैं।”

डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति, नोडल अधिकारी (RBSK)

जनपद में अब तक 228 मासूमों को समय पर रेफरल और बेहतर प्रबंधन से नई जिंदगी दी जा चुकी है।”  रमाकान्त शर्मा, डीईआईसी मैनेजर, आगरा

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