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दिल्ली में एलपीजी-संकट और महंगाई से व्यापारियों की परेशानी बढ़ी,

PNG कनेक्शन के लिए कनॉट प्लेस में लंबा इंतजार

वीना टंडन
नई दिल्ली, 30 मार्च 2026। एलपीजी संकट और महंगाई के बीच राजधानी दिल्ली के व्यवसाय और आम लोगों की परेशानियाँ बढ़ती जा रही हैं। कनॉट प्लेस (CP) के रेस्टोरेंट संचालक कई सालों से पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक कोई सुविधा नहीं मिली। NDTA के अनुसार CP के 200 से अधिक रेस्टोरेंट संचालक कनेक्शन के लिए तैयार हैं।
कनॉट प्लेस में PNG लाइन बिछाने का काम 2006 में शुरू हुआ था और दावा था कि 2012 तक कनेक्शन मिलने लगेगा। लेकिन 2026 में भी रेस्टोरेंट संचालक पीएनजी का इंतजार कर रहे हैं। एलपीजी संकट के चलते कई रेस्टोरेंट्स ने मेन्यू में कटौती करनी पड़ी तो कुछ ने महंगे सिलेंडर खरीदकर काम चलाया। NDTA के जनरल सेक्रेटरी विक्रम बधवार ने बताया कि 2024 में कुछ ब्लॉकों तक PNG लाइन बिछाई गई थी, लेकिन काम रुक गया।
IGL के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी कारणों से काम रुका था। 21 फरवरी से यह फिर शुरू हुआ है और अप्रैल तक कनॉट प्लेस के इनर और आउटर सर्कल में लाइन बिछा दी जाएगी। अभी तक 50 से अधिक रेस्टोरेंट्स ने कनेक्शन के लिए रजिस्ट्रेशन करा लिया है।
सरोजिनी नगर मार्केट में एलपीजी संकट से व्यापारियों की मुश्किलें
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच दिल्ली में एलपीजी सिलिंडर की कमी ने छोटे दुकानदारों और खाने-पीने की दुकानों को प्रभावित किया है। सरोजिनी नगर मार्केट में कई दुकानें बंद हो गई हैं। दुकानदारों का कहना है कि आलू-पूरी, छोले-भटूरे, दाल-रोटी जैसी चीजें बेचने वाले लगभग 45% स्टॉल बंद हैं। कुछ दुकानों ने कीमतें बढ़ा दी हैं।
दुकानदार ने बताया कि खाने-पीने की दुकानों के बंद होने से मार्केट में ग्राहक कम हो गए हैं। बीते कुछ दिनों में सेल लगभग 40% तक गिर गई है।
यूरिया और DAP फर्टिलाइजर की सप्लाई पर बढ़ा ध्यान
खेती सीजन से पहले यूरिया और DAP फर्टिलाइजर की संभावित कमी को लेकर बाजार में चर्चाएं तेज हैं। दिल्ली में यूरिया की स्थिति फिलहाल सामान्य है और जरूरत जून-जुलाई में बढ़ेगी। DAP फर्टिलाइजर आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय हालात इसके दाम और उपलब्धता को प्रभावित कर सकते हैं।
फर्नीचर उद्योग में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स महंगे, उत्पादन प्रभावित
पश्चिम एशिया में तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण बोर्ड प्लाई, फोम और फर्नीचर के आइटम 10 से 45% तक महंगे हो गए हैं। फैक्ट्री और शोरूम मालिकों ने बताया कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के बढ़ते दामों से उत्पादन लागत बढ़ गई है। ग्राहक भी महंगे होने के कारण बाजार से दूर हो गए हैं।

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