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माई-बाप सरकार’ से ‘नागरिक देवो भव’ तक, मोदी ने दिखाया विकसित भारत का विजन

यूपीएससी के 100 साल पूरे होने पर बोले प्रधानमंत्री- बदलते भारत के लिए भर्ती प्रक्रिया और चयन के मानदंड भी बदलने होंगे 2047 का भारत आज से होगा काफी अलग, युवाओं की बढ़ती आकांक्षाओं के अनुरूप चाहिए प्रो-पीपल और प्रोएक्टिव गवर्नेंस फ्लाईदुबई हादसे में भारतीय कैप्टन स्मित के साहस को पीएम ने सराहा, परिवार से फोन पर की बात

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नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। इस मौके पर उन्होंने यूपीएससी की 100 साल की यात्रा को देश की प्रशासनिक व्यवस्था और युवाओं की आकांक्षाओं से जोड़ते हुए कहा कि बदलते भारत की जरूरतों के अनुरूप सिविल सेवाओं में भी बदलाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि 2047 का भारत आज के भारत से काफी अलग होगा और ऐसे में देश को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक प्रशासनिक पेशेवर तैयार करने होंगे।

समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. प्रमोद कुमार मिश्र, यूपीएससी के चेयरपर्सन एवं पूर्व रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार तथा कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर यूपीएससी के 100 वर्ष पूरे होने की स्मृति में डाक टिकट और सिक्का जारी किया। साथ ही 100 महत्वपूर्ण केस लॉ के संकलन का भी लोकार्पण किया गया।

कैप्टन स्मित के साहस को किया सलाम

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में हुई घटना का जिक्र करते हुए की। उन्होंने कहा कि इस दौरान भारतीय कैप्टन स्मित ने धैर्य, सूझ-बूझ और साहस का परिचय दिया। प्रधानमंत्री ने बताया कि इजराइल के प्रधानमंत्री ने भी इस घटना के संदर्भ में एक भारतीय द्वारा बड़ी त्रासदी को टालने की बात कही है।

मोदी ने कहा कि कैप्टन स्मित की बहादुरी हर भारतीय को गौरवान्वित करती है। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्मित के पिता भूपेंद्र भाई, मां गीता बहन और पत्नी सोनल से भी बात की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्मित का इलाज चल रहा है और सभी को उनके बेहतर स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना करनी चाहिए।

100 साल की विरासत का जिक्र

प्रधानमंत्री ने कहा कि यूपीएससी के 100 साल पूरे होना सिर्फ एक संस्था की स्थापना की शताब्दी नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं की आकांक्षाओं का उत्सव भी है, जो हर साल देश की प्रशासनिक सेवाओं में आने का सपना देखते हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान पीढ़ियां बदलीं, सरकारें बदलीं, तकनीक और पाठ्यक्रम बदले, लेकिन यूपीएससी के प्रति देशवासियों का विश्वास कायम रहा।

उन्होंने स्वतंत्र भारत के निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका को याद करते हुए कहा कि आजादी के बाद उनके सामने देश को एकजुट रखने और राष्ट्र के पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती थी। प्रधानमंत्री के अनुसार, राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक ‘स्टील फ्रेम’ उपलब्ध कराने में पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही और उन्होंने यूपीएससी को स्वतंत्र भारत के प्रमुख संस्थानों में मजबूत आधार दिया।

2047 का भारत होगा अलग

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब इतिहास से आगे बढ़कर भारत का भविष्य देश के सामने है। विकसित भारत के लिए जिस तरह के प्रशासन की जरूरत होगी, उसे यूपीएससी और राज्य लोक सेवा आयोग जैसे संस्थान काफी हद तक संभव बनाएंगे। उन्होंने कहा कि आज भर्ती किए जा रहे युवा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और आने वाले समय में इसी भारत से सबसे अधिक लाभान्वित भी होंगे।

मोदी ने कहा कि 2047 का भारत आज के भारत से काफी अलग होगा। वह अधिक शहरी होगा, गांवों और शहरों के बीच की दूरी कम होगी तथा नागरिकों, विशेषकर युवाओं की उम्मीदें और आकांक्षाएं और बढ़ेंगी।

एआई के दौर में तेज समाधान की उम्मीद

प्रधानमंत्री ने प्रशासन में तकनीक के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कुछ ही क्षणों में हजारों दस्तावेजों को प्रोसेस कर सकता है और सरकार के पास रियल टाइम डेटा उपलब्ध है, तो नागरिक भी तेजी से समाधान की उम्मीद करेंगे। ऐसे बदलावों के बीच सिविल सेवाओं में भी नई जरूरतों के अनुरूप परिवर्तन आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए चयन के मानदंड और भर्ती प्रक्रियाओं को भी ढालना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय सरकार को ‘माई-बाप’ मानने की सोच थी, लेकिन आज शासन का मंत्र ‘नागरिक देवो भव’ होना चाहिए।

गरीबों की तकलीफ समझने वाले अधिकारी चाहिए

मोदी ने कहा कि नागरिकों की सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और राष्ट्रीय तथा राज्य स्तर पर चयन प्रक्रियाएं इसी भावना के अनुरूप तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत है जो प्रो-पीपल, प्रोएक्टिव और गुड गवर्नेंस की भावना के साथ काम करें तथा गरीबों और वंचितों की कठिनाइयों को संवेदनशीलता से समझ सकें।

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