
2047 तक बदल जाएगी दिल्ली की तस्वीर: 40 लाख नए घर, 695 किमी मेट्रो और यमुना किनारे 52 किमी साइकिल ट्रैक
वीना टंडन
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के भविष्य की तस्वीर अब और साफ हो गई है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को मास्टर प्लान दिल्ली-2047 की अधिसूचना जारी कर दी। इस महत्वाकांक्षी योजना में बढ़ती आबादी के लिए करीब 40 लाख नए घर, मेट्रो नेटवर्क को बढ़ाकर 695 किलोमीटर करने और यमुना किनारे 52 किलोमीटर लंबे साइकिल ट्रैक समेत कई बड़े बदलावों का खाका खींचा गया है।
3.2 करोड़ आबादी को ध्यान में रखकर तैयारी
मास्टर प्लान में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2047 तक दिल्ली की आबादी करीब 3.2 करोड़ पहुंच सकती है। इसके लिए आवास, परिवहन, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने पर जोर दिया गया है। करीब 40 लाख अतिरिक्त आवास इकाइयों की जरूरत को पूरा करने के लिए पुराने इलाकों के पुनर्विकास के साथ नई योजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
मेट्रो का जाल 695 किलोमीटर तक
दिल्ली का मौजूदा मेट्रो नेटवर्क करीब 416 किलोमीटर है। मास्टर प्लान में इसे बढ़ाकर 695 किलोमीटर करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ आरआरटीएस नेटवर्क और बस कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया जाएगा। मेट्रो, रेलवे और आरआरटीएस स्टेशनों के आसपास ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट को बढ़ावा देकर लोगों को सार्वजनिक परिवहन के करीब आवास और सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
यमुना किनारे साइकिल से सफर
यमुना को दिल्ली के विकास का अहम हिस्सा बनाने पर भी जोर है। योजना में नदी किनारे 52 किलोमीटर का साइकिल ट्रैक प्रस्तावित है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र बढ़ाने और नालों के उपचार के जरिए यमुना को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम होगा। करीब 22 नालों के उपचार और बाढ़ क्षेत्र के संरक्षण का भी लक्ष्य रखा गया है।
तीन बड़े मल्टी-मॉडल हब
आनंद विहार-कड़कड़डूमा, कश्मीरी गेट और निजामुद्दीन-सarai काले खां जैसे प्रमुख परिवहन केंद्रों को मल्टी-मॉडल हब के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां मेट्रो, बस, रेलवे और आरआरटीएस जैसी परिवहन सेवाओं के बीच यात्रियों को आसानी से आवाजाही की सुविधा देने का प्रयास होगा।
पुरानी कॉलोनियों का होगा पुनर्विकास
मास्टर प्लान में पुरानी डीडीए कॉलोनियों, पुनर्वास कॉलोनियों, सहकारी आवास समितियों और अन्य पुराने आवासीय इलाकों के पुनर्विकास का रास्ता भी खोला गया है। वहीं झुग्गी बस्तियों के लिए ‘जहां झुग्गी, वहां मकान’ जैसी पहल के जरिए आवास उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
मेट्रो-आरआरटीएस के आसपास बढ़ेगा निर्माण
मेट्रो, आरआरटीएस और रेलवे स्टेशनों से करीब 500 मीटर के दायरे में ज्यादा घनत्व वाले विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे एक ओर सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बढ़ाने और दूसरी ओर सीमित जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने की कोशिश होगी।
निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने की तैयारी
मास्टर प्लान में पैदल चलने, साइकिल और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने की नीति पर जोर दिया गया है। पार्किंग व्यवस्था को भी एकीकृत करने की योजना है, ताकि निजी वाहनों के बजाय लोग सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करें। इलेक्ट्रिक और अन्य स्वच्छ ऊर्जा वाले वाहनों के लिए जरूरी ढांचा विकसित करने पर भी ध्यान रहेगा।
कुल मिलाकर, मास्टर प्लान दिल्ली-2047 का लक्ष्य सिर्फ नए मकान और सड़कें बनाना नहीं, बल्कि राजधानी को आवास, परिवहन, पर्यावरण और रोजगार के लिहाज से अधिक व्यवस्थित और टिकाऊ शहर के रूप में विकसित करना है। हालांकि इन योजनाओं का असली असर इनके चरणबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।







