
अमेरिका में जन्म लेते ही नागरिकता पर ट्रंप का वार, बर्थराइट सिटीजनशिप को सीमित करने की तैयारी
वीना टंडन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए फैसलों के बाद अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को स्वतः नागरिकता मिलने की व्यवस्था को लेकर विवाद फिर गहराने लगा है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, नए आदेशों का मकसद उन मामलों को सीमित करना है, जहां अमेरिका में जन्मे बच्चों की नागरिकता का दावा उनके गैर-अमेरिकी या अस्थायी/अनधिकृत स्थिति वाले माता-पिता के आधार पर किया जाता है।
क्या है बर्थराइट नागरिकता?
अमेरिका में बर्थराइट नागरिकता का अर्थ उस व्यवस्था से है, जिसके तहत अमेरिकी धरती पर जन्म लेने वाले बच्चे को आम तौर पर अमेरिकी नागरिक माना जाता है। यह व्यवस्था अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की नागरिकता संबंधी धारा से जुड़ी है।
ट्रंप लंबे समय से इस व्यवस्था में बदलाव की वकालत करते रहे हैं। उनका प्रशासन मानता है कि मौजूदा नियमों का कुछ मामलों में दुरुपयोग होता है। नए आदेशों में विशेष रूप से उन परिस्थितियों को निशाना बनाया गया है, जहां बच्चे के माता-पिता अमेरिकी नागरिक नहीं हैं और अमेरिका में उनकी मौजूदगी अस्थायी या अनधिकृत है।
अदालत में पहुंच सकता है मामला
ट्रंप के फैसले से नागरिक अधिकार संगठनों और प्रशासन के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं। संगठनों का तर्क है कि बर्थराइट नागरिकता को सीमित करने की कोशिश अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन से टकरा सकती है। ऐसे में नए आदेशों को अदालत में चुनौती दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
बर्थ टूरिज्म भी बहस के केंद्र में
अमेरिका में बच्चे के जन्म के उद्देश्य से यात्रा करने को लेकर भी लंबे समय से बहस होती रही है। इसके सटीक पैमाने पर कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज के 2020 के अनुमान के मुताबिक, 2016-17 के दौरान करीब 20 हजार से 25 हजार महिलाएं बच्चे को जन्म देने के उद्देश्य से अमेरिका पहुंची थीं। ट्रंप के नए फैसलों ने बर्थराइट नागरिकता और अमेरिकी आव्रजन नीति पर पुरानी बहस को फिर हवा दे दी है।

