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मासूम का इलाज कराने मेडिकल कालेज पहुंचे दम्पति को बाउंसरों ने दौड़ा दौड़ा कर पीटा मचा हड़कंप

राकेश पाण्डेय

महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा कर्मियों की कथित दबंगई का मामला सामने आया है। वैसे यह मामला नया नहीं है, अक्सर ये दबंग बाउंसर किसी भी तीमारदार के साथ करते रहते हैं।बेटी का इलाज कराने पहुंचे एक तीमारदार के साथ कॉलेज में तैनात बाउंसरों ने पति पत्नी दोनों को दौड़ा कर डंडों से पीटा जिसका सीढ़ियों भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा हैं । पीड़ित ने कोतवाली थाने में तहरीर भी दी है। चर्चा तो यह भी है कि यहां पैकेज पर तैनात प्राचार्य का राजनीतिक रसूख बड़ा है ।साथ ही बगल के बलिया जिले के रहने वाले भी हैं।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है।

*चाय नाश्ते में खलल और फिर तार-तार हो गयी महर्षि विश्वामित्र की गरिमा!*

जानकारी के अनुसार टारीघाट निवासी मनोज यादव अपनी बेटी का इलाज कराने मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग पहुंचे थे। पीड़ित के मुताबिक डॉक्टर को दिखाने के बाद वह दवा से संबंधित जानकारी लेने दोबारा डॉक्टर से मिलने पहुंचे। आरोप है कि वहां मौजूद बाउंसरों ने उन्हें रोक दियाचर्चा है कि ।डा साहब इस दौरान चाय नाश्ता कर रहे थे
और कुछ देर बाद आने को कहा।मनोज यादव का आरोप है कि दोबारा जानकारी लेने पहुंचने पर सुरक्षा कर्मियों ने अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया।

*मामले को जांच की आंच पर तपाने में लगे प्राचार्य आनंद मिश्रा कोतवाली पहुंचा पीड़ीत*

विरोध करने पर गाली-गलौज करते हुए मारपीट की गई। मौजूद लोगों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।पीड़ित मनोज यादव ने मेडिकल कॉलेज में तैनात बाउंसरों के खिलाफ सदर कोतवाली में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।मामले को गंभीरता से लेते हुए मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. डॉ. आनंद मिश्रा ने बताया कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आया है। पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

*बार बार संगीन मामलों को जांच की आंच में तपाकर खाक कर चुके हैं प्राचार्य*

घटना के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और तीमारदारों के साथ व्यवहार को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सवाल तो यह भी है कि जब किसी डाक्टर, बाउंसर या कर्मचारी के दुर्व्यवहार का मामला मिडिया में हाईलाइट होता है तो प्राचार्य जांच समिति का गठन करके मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं और आम जनता हफ्ते – दो हफ्ते में भूल जाती है।

*अस्पताल में सहयोग व सुरक्षा की जगह मारपीट : प्राचार्य की सफाई के लिए जुटे दर्जनों कलाकार*

ये दबंग सुरक्षा कर्मचारी पत्रकारों से भी बेहुदगी करते हैं ।आखिर अस्पताल में सुरक्षा कर्मियों के बाद बाउंसरों की आवश्यकता क्या है वह भी असहला धारी यह बात कुछ मेल नहीं खाती लेकिन कुछ प्रिंट व नेशनल चैनलों व न्यूज एजेंसियों की माईक आइडी वाले व यूट्यूब फेसबुक पर बीढ़ियों डाउनलोड कर अफसरों व आम लोगों को व्युवर गिनाने में मग्न है। प्राचार्य जी मस्त रहते हैं। एक प्रतिष्ठित प्रिंट मीडिया के पत्रकार की नौकरी भी अपने राजनैतिक आका दम पर खा चुके हैं। चर्चा तो यह भी है कि देश के सभी बड़े न्यूज चैनलों की माईक आइडी लगाकर लम्बी लम्बी बाईट के साथ न्यूज एजेंसियों का माईक लेकर वन-टू-वन करने वालों सभ्य जनों की खबरें न्यूज चैनलों पर नहीं दिखती। कई तो ऐसी न्यूज एजेंसियों के महारथी है जिनका न खुद का कोई प्लेटफार्म है न ही फ्रेकवेन्सी।

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