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वाह रे सिस्टम!..सिर्फ दो अस्पतालों पर कार्यवाही?

डीएम साहब…भ्रष्ट अधिकारियों की मेहरबानी से जिले में अब भी चल रहे दो दर्जनों फर्जी अस्पताल?*

स्टार न्यूज़ टेलिविजन

मई शुक्रवार 15-5-2026

गाजीपुर:- खबर गाज़ीपुर जिले से है जहां पर नए जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला द्वारा कार्यभार संभालने के बाद से प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रही है। हर विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सक्रियता बढ़ी है। इसी क्रम में हाल ही में नंदगंज क्षेत्र अंतर्गत संचालित आयुष्मान हॉस्पिटल पर स्वास्थ्य विभाग ने जिलाधिकारी के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया। इससे पहले शिव अस्पताल पर भी कार्रवाई की गई थी।

हालांकि स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद अब क्षेत्र की जनता के बीच कई सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि क्या सिर्फ एक-दो अस्पतालों पर कार्रवाई कर देने से पूरे जिले में चल रहे अवैध और फर्जी अस्पतालों का नेटवर्क समाप्त हो गया है? स्थानीय लोगों के अनुसार गाजीपुर जिले, खासकर नंदगंज क्षेत्र में अब भी कई ऐसे अस्पताल संचालित हो रहे हैं, जो बिना मानक और बिना वैध अनुमति के मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
चर्चा इस बात को लेकर भी है कि स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी लंबे समय से इन फर्जी अस्पतालों को संरक्षण देते रहे हैं।

आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की छत्रछाया में कई अस्पताल खुलेआम संचालित हो रहे हैं, जहां मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अगर निष्पक्ष जांच हो तो जिले में दर्जनों ऐसे अस्पताल सामने आ सकते हैं, जो नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो डीएम के सख्त रुख के बाद स्वास्थ्य विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने खुद को बचाने और प्रशासन के सामने साफ-सुथरी छवि पेश करने के लिए केवल चुनिंदा अस्पतालों पर कार्रवाई कराई। इसमें शिव अस्पताल और आयुष्मान अस्पताल का नाम सामने आया। लेकिन जनता का कहना है कि कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे जिले में व्यापक अभियान चलाकर अवैध अस्पतालों की जांच की जानी चाहिए।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला से मांग की है कि जिले में चल रहे सभी फर्जी अस्पतालों की सूची तैयार कर विशेष अभियान चलाया जाए। उनका कहना है कि अवैध अस्पतालों की वजह से आए दिन मरीजों की मौत और गंभीर लापरवाही के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे में लोगों की जान बचाने के लिए कठोर कार्रवाई बेहद जरूरी हो गई है।

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