
जनसमूह के बीच पहुँचे प्रधानमंत्री मोदी
कर्तव्य पथ पर जनउत्साह, सैन्य शक्ति और लोकतांत्रिक गौरव का भव्य प्रदर्शन
वीना टंडन
नई दिल्ली।गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दर्शक दीर्घाओं में बैठे नागरिकों का अभिवादन स्वीकार किया। प्रधानमंत्री को अपने बीच पाकर दर्शक दीर्घा में मौजूद लोग उत्साह से भर उठे। हाथों में तिरंगा लिए नागरिकों ने ‘भारत माता की जय’ के नारों के साथ प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। कई बच्चे कुर्सियों पर चढ़कर मुस्कुराते हुए प्रधानमंत्री की एक झलक पाने को आतुर दिखे। प्रधानमंत्री ने भी हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया, जिस पर उपस्थित जनसमूह ने तालियों और जयघोष से उनका अभिनंदन किया।
इसके पश्चात प्रधानमंत्री अपनी कार में सवार होकर कर्तव्य पथ पर आगे बढ़े और रास्ते में खड़े नागरिकों को हाथ हिलाकर अभिवादन करते रहे। इस दौरान दर्शक दीर्घाओं से ‘मोदी-मोदी’ के नारे भी गूंजे। प्रधानमंत्री ने कर्तव्य पथ के दूसरे हिस्से में जाकर भी नागरिकों से मुलाकात की, जहां उत्साहित लोगों ने इस ऐतिहासिक क्षण को अपने कैमरों में कैद किया।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पारंपरिक लाल रंग की पगड़ी में नजर आए, जिस पर सुनहरे रंग की कलात्मक छाप थी। गणतंत्र दिवस के अवसर पर विशिष्ट पगड़ी धारण करना प्रधानमंत्री की पहचान बन चुका है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 से प्रधानमंत्री गणतंत्र दिवस समारोह के बाद प्रोटोकॉल तोड़ते हुए आम नागरिकों से सीधे संवाद करते आ रहे हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के दौरे से हुई, जहां उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्र के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीरों को श्रद्धांजलि दी।
वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ पारंपरिक बग्गी में कर्तव्य पथ पर पहुँचीं। राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की सुरक्षा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ से गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व किया। इस अवसर पर दोनों यूरोपीय नेता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में इस वर्ष राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ, भारत की अभूतपूर्व विकास यात्रा, सशक्त सैन्य शक्ति और समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। परंपरा के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, जिसके बाद स्वदेशी 105 एमएम लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी गई। यह देश में निर्मित तोपखाना प्रणाली है।
पूर्व में 21 तोपों की सलामी के लिए ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोपों का उपयोग किया जाता था, लेकिन अब 172 फील्ड रेजिमेंट की 1721 सेरेमोनियल बैटरी यह सम्मान निभा रही है। परेड के दौरान भारतीय सेना की जबरदस्त मारक क्षमता का परिचय भी मिला। इसमें टी-90 भीष्म और अर्जुन टैंक, बीएमपी-2 सारथ वाहन, मिसाइल प्रणालियाँ तथा ध्रुव, रुद्र, अपाचे और प्रचंड हेलीकॉप्टर शामिल रहे। इसके साथ ही आकाश, एमआरएसएएम और ब्रह्मोस मिसाइल प्रणालियों का भी प्रदर्शन किया गया, जिसने देश की रक्षा शक्ति को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया।

