
36 दिन बाद खत्म हुआ CJP का जंतर-मंतर आंदोलन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोली पार्टी— ‘हमने कर दिखाया’
वीना टंडन
नई दिल्ली,। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से चल रहा धरना-प्रदर्शन शनिवार को समाप्त हो गया। प्रदर्शनकारियों के हटने के साथ ही जंतर-मंतर पूरी तरह खाली हो गया और राजधानी में लंबे समय से जारी आंदोलन का पटाक्षेप हो गया।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के साथ जारी पत्र में शिक्षा मंत्री के तौर पर अपनी उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग युवाओं के आंदोलन का गलत फायदा उठा सकते थे, इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंप दिया गया है।
उधर, CJP ने इसे अपनी बड़ी राजनीतिक जीत करार दिया। नीट यूजी पेपर लीक विवाद को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंच पर घुटनों के बल बैठकर कहा, “हमने कर दिखाया। वे कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।” समर्थकों ने इसे छात्र आंदोलन की जीत बताते हुए जश्न मनाया।
सूत्रों के अनुसार, 21 जुलाई तक सरकार और भाजपा नेतृत्व का मानना था कि परीक्षा सुधारों और पेपर लीक पर की गई कार्रवाई के जरिए जनता को यह संदेश दिया जा सकेगा कि सरकार छात्रों के साथ खड़ी है। 20 जुलाई के प्रदर्शन में घायल छात्रों का हाल जानने के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह भी अस्पताल पहुंचे थे। 22 जुलाई तक भी सरकार इसे गंभीर राजनीतिक चुनौती नहीं मान रही थी।
बताया जाता है कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को शुरुआत में यह आंदोलन विपक्ष की राजनीतिक रणनीति लग रहा था। हालांकि, 22 और 23 जुलाई को एनडीए के सहयोगी दलों के साथ हुई बैठकों में यह राय बनी कि आंदोलन व्यापक रूप ले चुका है और स्थिति को संभालने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने होंगे। इसके बाद सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और सख्त कानूनों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, लेकिन अंततः धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ आंदोलन समाप्त हो गया।






