
मूवी रिव्यू: शादी की नहीं, सही फैसले की कहानी है ‘दुल्हनिया ले आएगी’
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐ (4/5)
वीना टंडन
नई दिल्ली। क्या 30 वर्ष की उम्र पार करते ही किसी लड़की की शादी कर देना समाज की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए? निर्देशक आकाशादित्य लामा की फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ इसी सोच पर सवाल उठाती है। करीब 2 घंटे 8 मिनट की यह फिल्म कॉमेडी, भावनाओं और पारिवारिक रिश्तों के जरिए एक गंभीर सामाजिक मुद्दे को सहज और मनोरंजक अंदाज में दर्शाती है।
फिल्म की कहानी 32 वर्षीय नव्या (खुशाली कुमार) के इर्द-गिर्द घूमती है। नव्या के पिता (महेश मांजरेकर) उसकी शादी को लेकर बेहद चिंतित हैं और जल्दबाजी में उसकी शादी ऐसे युवक से तय कर देते हैं, जिसका अतीत संदेह के घेरे में है। सच्चाई सामने आने के बाद भी नव्या पिता का दिल नहीं तोड़ना चाहती। ऐसे में वह फैसला करती है कि शादी उसी दिन होगी, लेकिन सही जीवनसाथी के साथ। इसके बाद कहानी कई रोचक और भावनात्मक मोड़ों से गुजरती है, जहां ओंकार कपूर का किरदार अहम भूमिका निभाता है।
फिल्म का सबसे प्रभावशाली हिस्सा इसका क्लाइमैक्स है, जो यह संदेश देता है कि शादी की कोई तय उम्र या “एक्सपायरी डेट” नहीं होती। लड़की को तभी विवाह करना चाहिए, जब उसे सही साथी मिले। हालांकि पहले हाफ में कहानी की रफ्तार कुछ धीमी महसूस होती है और कुछ घटनाएं अनुमानित लगती हैं, लेकिन दूसरा हाफ फिल्म को मजबूती देता है।
अभिनय की बात करें तो खुशाली कुमार ने नव्या के किरदार को संवेदनशीलता और सहजता के साथ निभाया है। महेश मांजरेकर एक चिंतित पिता की भूमिका में प्रभावित करते हैं और उनके भावनात्मक दृश्य फिल्म की जान हैं। ओंकार कपूर कहानी में ताजगी लेकर आते हैं, जबकि पीयूष मिश्रा सीमित स्क्रीन टाइम में भी अपनी छाप छोड़ते हैं।
फिल्म का निर्माण विकास अग्रवाल, आकाशादित्य लामा, सुमन मौर्य और अतुल गंगवार ने किया है। निर्देशक आकाशादित्य लामा ने गंभीर विषय को बिना बोझिल बनाए मनोरंजक अंदाज में पेश किया है। सिनेमैटोग्राफी प्रभावी है और विजुअल ट्रीटमेंट कहानी के अनुरूप नजर आता है। पहले हाफ की एडिटिंग थोड़ी और कसी जा सकती थी, लेकिन दूसरे हिस्से में फिल्म बेहतर गति पकड़ लेती है। संवाद कई जगह मुस्कान बिखेरते हैं, जबकि क्लाइमैक्स भावनात्मक असर छोड़ता है।
संगीत भी फिल्म की मजबूत कड़ी है। ‘बिटिया पराई नहीं होती’ गीत भावनात्मक रूप से जुड़ाव पैदा करता है, वहीं ‘जलवा दिखा जाए’ मनोरंजन का रंग भरता है।
फैसला
‘दुल्हनिया ले आएगी’ सिर्फ शादी की कहानी नहीं, बल्कि समाज में लड़कियों की शादी को लेकर बनी पारंपरिक सोच पर एक सार्थक सवाल है। कॉमेडी, इमोशन और सामाजिक संदेश का संतुलन इसे परिवार के साथ देखी जाने वाली एक अच्छी फिल्म बनाता है।





