
दिल्ली में हवा की गुणवत्ता “खतरनाक” स्तर पर; आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत
जहरीली हुई दिल्ली की सुबह
वीना टंडन
नई दिल्ली।राजधानी में वायु प्रदूषण ने शनिवार को नया रिकॉर्ड तोड़ दिया। शहर की हवा का स्तर इतनी खराब स्थिति में पहुंच गया कि लोगों ने आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ की शिकायतें कीं। लाइव डेटा के अनुसार, कई इलाकों में AQI 700 से ऊपर पहुंच गया, जो ‘खतरनाक’ श्रेणी में आता है।
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के अनुसार, कुछ इलाकों में AQI 445 तक पहुंच गया, जिसे ‘गंभीर’ माना जाता है। राजधानी के 37 एयर मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 32 पर प्रदूषण गंभीर स्तर पर रिकॉर्ड किया गया, और 19 जगहों पर हालात मेडिकल इमरजेंसी जैसे बताए गए।
सबसे प्रभावित इलाके:
आनंद विहार: AQI 631
अशोक विहार: 763
बवाना: 701
रोहिणी: 613
मुंडका: 483
वज़ीरपुर: 743
चांदनी चौक: 620
पटपड़गंज: 469
सोनिया विहार: 621
ITO और RK पुरम में भी हवा सांस लेने लायक नहीं रही।
सबसे कम AQI नगर में 356 रिकॉर्ड हुआ, लेकिन यह भी सुरक्षित स्तर से बहुत अधिक था।
रात में प्रदूषण का चरम:
रात करीब 1 बजे आनंद विहार में PM2.5 का स्तर 890 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया। यह राष्ट्रीय मानक से लगभग 15 गुना और WHO की सुरक्षित सीमा से लगभग 59 गुना अधिक है। नेहरू नगर में भी PM2.5 952 माइक्रोग्राम रिकॉर्ड किया गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
प्रदूषण क्यों बढ़ा?
विशेषज्ञों के अनुसार, राजधानी के अंदर से होने वाले उत्सर्जन और खराब मौसम की स्थिति मिलकर हालात को और खराब कर रही हैं। हवा लगभग स्थिर है, इसलिए प्रदूषण फैल नहीं रहा और जमीन के पास जम रहा है। सर्दियों में होने वाला टेम्परेचर इनवर्जन भी इस ज़हरीली हवा को सतह के पास फंसा देता है, जिससे सांस लेने की हालत और कठिन हो जाती है।
किसके लिए सबसे खतरनाक?
डॉक्टरों का कहना है कि यह हवा बच्चों, बुज़ुर्गों और दिल व फेफड़े की बीमारियों वाले लोगों के लिए सबसे खतरनाक है। आम लक्षणों में आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं।
सलाह:
एक्सपर्ट्स लोगों को चेतावनी दे रहे हैं कि वे बेवजह बाहर न निकलें, मास्क पहनें और घर के अंदर रहें। राहत तभी मिलने की उम्मीद है जब मौसम बदलेगा और हवा तेज़ चलेगी। फिलहाल, राजधानी की हवा लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा बनी हुई है, और प्रदूषण नियंत्रण के कड़े और प्रभावी उपायों की सख्त जरूरत है।


