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48 घंटे में जवाब मांगा, 10 दिन की मांग अनुचित — अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता

दिल्ली विधानसभा–पंजाब पुलिस विवाद:

वीना टंडन
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने 6 जनवरी को सदन में विपक्ष के नेता द्वारा कथित अमर्यादित और आपत्तिजनक शब्दों के प्रयोग से जुड़े घटनाक्रम पर आयोजित प्रेस वार्ता में पंजाब पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि विधानसभा सचिवालय की ओर से 48 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया था, लेकिन पंजाब पुलिस ने इसके लिए 10 दिन का समय मांगा, जिसे अनुचित माना गया है।
पंजाब पुलिस को नोटिस, निष्पक्षता पर सवाल
अध्यक्ष ने बताया कि विधानसभा सचिवालय ने पंजाब के डीजीपी, स्पेशल डीजीपी (साइबर सेल) और जालंधर के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किए हैं। पंजाब पुलिस का दावा है कि एफआईआर दर्ज करने और फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया कुछ ही घंटों में पूरी कर ली गई, लेकिन विधानसभा के नोटिस का जवाब देने के लिए 10 दिन का समय मांगा गया।
अध्यक्ष के अनुसार, यह स्थिति जांच एजेंसी की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करती है।
वीडियो और दस्तावेज विधानसभा की संपत्ति
विजेंद्र गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यह पूरा मामला दिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में आता है और सभी मूल वीडियो व दस्तावेज विधानसभा की संपत्ति हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना विधानसभा से संपर्क किए पंजाब सरकार ने फॉरेंसिक जांच कैसे शुरू कर दी, किसके आदेश पर जांच कराई गई और किस वीडियो सामग्री का उपयोग किया गया।
अध्यक्ष ने कहा कि पूरे घटनाक्रम से ऐसा प्रतीत होता है कि तथ्यों को स्पष्ट करने के बजाय भ्रम फैलाने और जनता को गुमराह करने का प्रयास किया गया, जबकि लोगों की भावनाएं पहले ही आहत हो चुकी हैं।
15 जनवरी तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
विधानसभा सचिवालय ने पंजाब पुलिस को निर्देश दिया है कि वह 15 जनवरी तक सभी तथ्यों और स्पष्टीकरणों के साथ अपनी पूर्ण रिपोर्ट पेश करे, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।
मामले को कानूनी रूप से संवेदनशील बताते हुए अध्यक्ष ने कहा कि घटनाक्रम राजनीतिक हस्तक्षेप की ओर संकेत करता है और सदन की गरिमा को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
माफी न मिलने से सदन की कार्यवाही प्रभावित
अध्यक्ष ने बताया कि 6 जनवरी की घटना के बाद सदन की कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हुई। विपक्ष के नेता की अनुपस्थिति के कारण 6, 7 और 8 जनवरी को लगातार व्यवधान उत्पन्न हुआ।
7 जनवरी को कार्यवाही के वीडियो देखने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि की गई टिप्पणियों से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, जिन्हें पूज्य गुरुओं के प्रति असम्मान के रूप में देखा गया।
उन्होंने कहा कि सदस्यों की सर्वसम्मति थी कि विपक्ष के नेता सदन में आकर बिना शर्त माफी मांगें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद 8 जनवरी को विपक्ष के अनुरोध पर वीडियो सामग्री को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजने का निर्णय लिया गया।
अध्यक्ष ने दोहराया कि फॉरेंसिक जांच कराने का अधिकार केवल दिल्ली विधानसभा को है और विधानसभा पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य करेगी, ताकि सच्चाई सामने आए और सदन की गरिमा बनी रहे।

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