
छात्र संघ चुनाव हिंसा मामले में कार्रवाई, एबीवीपी ने आदेश को बताया भेदभावपूर्ण
वीना टंडन
नई दिल्ली।यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा 9 जनवरी को जारी आदेश में वर्ष 2024 में स्कूल ऑफ लैंग्वेज में हुए छात्र संघ चुनावों से जुड़े घटनाक्रम पर सख्त रुख अपनाया गया है। आदेश के अनुसार, उस दौरान आयोजित गवर्निंग बॉडी मीटिंग में कुछ छात्र अनुशासनहीनता करते पाए गए, जो यूनिवर्सिटी के निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संबंधित छात्रों के खिलाफ कार्रवाई यूनिवर्सिटी के नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप की गई है। आदेश में छात्रों को निर्देश दिया गया है कि वे 10 दिनों के भीतर जुर्माने की राशि जमा करें, अन्यथा आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
एबीवीपी ने लगाया भेदभाव का आरोप
इस आदेश को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कड़ा विरोध जताया है। एबीवीपी का कहना है कि यह कार्रवाई एकतरफा और भेदभावपूर्ण है। संगठन का आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन एबीवीपी से जुड़े छात्रों को निशाना बना रहा है, जबकि लेफ्ट समर्थित छात्रों को इसी तरह के मामलों में कार्रवाई से बचाया जाता रहा है।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि साल 2024 में छात्र संघ चुनावों के सिलसिले में स्कूल ऑफ लैंग्वेज की गवर्निंग बॉडी मीटिंग के दौरान एबीवीपी और लेफ्ट समर्थित छात्रों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। इस दौरान परिसर में अफरा-तफरी मच गई थी।
इस झड़प के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे, जिनमें छात्र एक-दूसरे पर डंडों से हमला करते और लात-घूंसे बरसाते हुए नजर आए थे। हिंसा में कई छात्र घायल भी हुए थे।
घटना के बाद दोनों छात्र संगठनों ने एक-दूसरे पर हिंसा शुरू करने के आरोप लगाए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए उस समय यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जांच के आदेश दिए थे और यह स्पष्ट किया था कि हिंसा में शामिल पाए जाने वाले किसी भी छात्र को बख्शा नहीं जाएगा।
अब प्रशासन द्वारा जारी ताजा आदेश के बाद एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ गया है और परिसर में छात्र राजनीति को लेकर माहौल गर्माता नजर आ रहा है।


