
क्रीं-कुण्ड महानिर्वाण दिवस:अघोरानाम परो मंत्रः-नास्ति तत्त्वं’ एवं ‘श्री सर्वेश्वरी त्वं पाहिमाम शरणागतम’
स्टार न्यूज़ टेलीविजन
राकेश की रिपोर्ट
वाराणसी:आदि शक्ति कहे जाने वाले महान संत अघोरेश्वर महाप्रभु बाबा अवधूत भगवान राम जी को देश-विदेश के अघोर श्रद्धालुजन ईश्वर के रुप में जानते-मानते और पूजते हैं । अपने आध्यात्मिक तपोबल से लाखों लोगों का कल्याण करने और विश्वविख्यात समाजिक संस्था, ‘श्री सर्वेश्वरी समूह’, के ज़रिए अनगिनत कुष्ठ सेवियों की सेवा का संदेश देने वाले महाप्रभु को अध्यात्म की दुनिया में उच्चतम पायदान पर गिना जाता है ।
जन-कल्याण के लिए ‘श्री सर्वेश्वरी समूह’ के तहत ’19 सूत्रीय’ समाजिक कार्यक्रम की नींव रखने वाले अघोरेश्वर महाप्रभु जब तक अपनी स्थूल काया में रहे, अनवरत लाखों लोगों का कल्याण करते रहे । अस्पृश्य माने जाने वाली अघोर परंपरा को आमजन से जोड़ने वाले महाप्रभु ने 29 नवंबर 1992 को अपनी मानव काया को त्याग दिया । दुनिया के सभी अघोर आश्रमों में इस (29 नवंबर) तारीख़ को महाप्रभु का निर्वाण दिवस मनाया जाता है । इसी कड़ी में विश्वविख्यात अघोरपीठ, ‘बाबा कीनाराम स्थल’, क्रीं-कुण्ड’, रविन्द्र पुरी में प्रातः काल साफ़-सफ़ाई और प्रातःकालीन दैनिक आरती के बाद ‘महानिर्वाण दिवस’ का कार्यक्रम शुरु हुआ ।
पूरी दुनिया में अघोर परम्परा के ईष्ट-आराध्य-मुखिया और ‘क्रीं-कुण्ड’ पीठ के पीठाधीश्वर, अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी, के दिशा-निर्देशन में इस पीठ परिसर में मौज़ूद अघिरेश्वर महाप्रभु की समाधि पर, अघोरेश्वर महाप्रभु की प्रतिमा पर, माल्यार्पण के पश्चात उनकी आरती की गयी और उन्हें प्रसाद अर्पित किया गया । इसके बाद ‘सफ़ल योनि’ पुस्तिका का पाठ कर उपस्थित जनसमुदाय को कृतार्थ किया गया । इसके बाद भक्तों द्वारा ‘अघोरानाम परो मंत्रः-नास्ति तत्त्वं’ एवं ‘श्री सर्वेश्वरी त्वं पाहिमाम शरणागतम’ का मंत्र जाप किया गया । अंत में भंडारा के ज़रिये प्रसाद वितरण का कार्यक्रम शुरू हुआ जो देर शाम तक जारी रहा । इस मौक़े पर देश-विदेश के सैकड़ों श्रद्धालुजन उपस्थित थे । यह जानकारी बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड’ के मीडिया प्रभारी संजय सिंह ने दी है।