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जमीयत ओपन स्कूल सम्मान समारोह

जमीयत ओपन स्कूल सम्मान समारोह

‘साथ बढ़ने और सीखने की साझा विरासत’ को आगे ले जाने में जमीयत उलेमा-ए-हिंद का भारी योगदान – NIOS चेयरपर्सन  प्रोफेसर सरोज शर्मा

“ये छात्र जल्द ही अपनी प्रतिभा से देश को गौरवान्वित करेंगे! – मौलना महमूद असद मद

उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए मदरसा अधिकारियों, छात्रों, साथ ही इसके लिए समर्पित शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रयासों को सम्मान देने के लिए जमीयत उलमा ए हिंद (जेयूएच) की शाखा जमीयत ओपन स्कूल (जेओएस) ने आज (15 Sep 2023) नई दिल्ली स्थित अपने कार्यालय में एक अभिनंदन कार्यक्रम का आयोजन किया

इस कार्यक्रम की मेजबानी जेयूएच अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने की। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूल (एनआईओएस) की चेयरपर्सन प्रोफेसर सरोज शर्मा इस अवसर पर मुख्य अतिथि थीं

अपने स्वागत भाषण में जमीयत उलेमा ए  हिंद के अध्यक्ष महमूद असद मदनी ने कहा, “आधुनिक समय तेजी से बदल रहा है और नई प्रौद्योगिकियां तेजी से आ रही हैं; इसलिए मदरसा छात्रों को ऐसे उपकरणों और ज्ञान से लैस करने की आवश्यकता महसूस की गई है जो उन्हें आधुनिक दुनिया के मुद्दों से निपटने में मदद कर सकें और ताकि वे चुनौतियों का डटकर सामना कर सकें। तभी वे जिम्मेदारियों और अपने विचारों और संवादों को सही तरीके से रखने के तरीके को समझ सकेंगे और सीख सकेंगे कि समझ ही कामयाबी की कुंजी है।

 

इस महान संयुक्त उद्यम पहल में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस) के योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “जमीयत ओपन स्कूल (जेओएस) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग के बीच  ये पवित्र साझेदारी छात्रों को आधुनिक चुनौतियों का मूल्यांकन करने और उनका समाधान करने में मदद करने के लिए है। मदरसे पहले से ही शिक्षा प्रदान कर रहे हैं; मदरसा व्यवस्था में कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ उनकी कुशलता को निखारने की है। इतने सारे छात्रों के सपनों को साकार करने में हमारा समर्थन करने के लिए एनआईओएस को धन्यवाद देता हूं। मुझे पूरी उम्मीद है कि एक दिन एनआईओएस गर्व से कहेगा कि अधिकांश मेधावी छात्र जमीयत ओपन स्कूल से आते हैं। ये छात्र न केवल जमीयत उलेमा ए हिंद को गौरवान्वित करेंगे, बल्कि एनआईओएस के साथ-साथ हमारे महान राष्ट्र को भी गौरवान्वित करेंगे

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. सरोज शर्मा ”यूनेस्को लर्निंग: द ट्रेजर विदइन (1996)” का हवाला देते हुए अपने सम्बोधन में कहा कि  शिक्षा चार स्तंभों पर आधारित है जिसमे जानने की चाह, करने की चाह एवं साथ रहना सीखना भी शामिल है। जमीयत उलेमा ए हिंद द्वारा जमीयत ओपन स्कूल और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग के बीच यह संयुक्त उद्यम छात्रों को इन उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद करता है। उन्हें साथ मिलकर बढ़ने और सीखने की साझा विरासत को आगे बढ़ाना है। इसका उद्देश्य हमारी संस्कृति को संरक्षित करना और राष्ट्र का निर्माण करना है।

उन्होंने देश में साक्षरता स्तर को ऊपर उठाने की दिशा में जेओएस के प्रयासों की सराहना की और कहा कि नई शिक्षा नीति का लक्ष्य पश्तो और फारसी जैसी कई भाषाओं को अपने दायरे में लाना है। उम्मीद है, हम आधुनिक प्रगति के साथ बने रहेंगे और साथ मिलकर बढ़ने की इस साझा विरासत को आगे बढ़ाने में सफल होंगे।’

डॉ. पी ए इनामदार, (अध्यक्ष- पी ए इनामदार यूनिवर्सिटी),  जिनका इस संयुक्त पहल को सफल बनाने में बहुत बड़ा योगदान रहा है, मदरसा प्रणाली की सराहना की और कहा कि यह बिना किसी सरकारी मदद के लाखों लोगों को साक्षर बना रहा है और इस प्रकार राष्ट्र निर्माण में मदद कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि अगर इन छात्रों को ‘दुनिया’ का भी ज्ञान होगा तो ‘दीन’ (धर्म) को बेहतर ढंग से समझ और समझा पाएंगे। इनामदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) और अन्य प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया और सिस्टम में नए उपकरणों को शामिल करने की आवश्यकता महसूस की ताकि छात्रों को जीवन और समय की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना करने में सक्षम बनाया जा सके क्यूंकि शिक्षा की गति दुनिया की गति के बराबर होनी चाहिए

जमीयत उलमा ए हिंद के मौलाना हकीमुद्दीन कासमी (महासचिव) एवं मौलाना नियाज़ अहमद  फारूकी (सचिव) दोनों ने जेओएस कार्य के बारे में विस्तार से बताया और बताया कि यह कैसे साक्षरता स्तर को ऊपर उठा रहा है और सशक्तिकरण और उज्ज्वल भविष्य की संभावनाओं को बढ़ावा दे रहा है। फारूकी ने कहा कि यह जमीयत उलमा ए हिंद अध्यक्ष मौलाना असद मदनी का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है और इस साझा पहल को राष्ट्रीय सफलता बनाने में मदद करने के लिए एनआईओएस के जबरदस्त समर्थन की सराहना की।     इस अवसर पर टॉप करने वाले मेधावी छात्रों एवं शिक्षकों को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में एनआईओएस और शिक्षा क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति भी देखी गई, जिनमें डॉ. एस फारूक, (अध्यक्ष – तस्मिया सोसायटी), मोहसिन अल्वी, (परियोजना प्रभारी – जमीयत उलमा-ए-हिंद), अब्दुल माजिद अल्वी, (शैक्षणिक प्रमुख – जमीयत उलमा-ए-हिंद), प्रोफेसर अख्तरुल वासे (पूर्व अध्यक्ष मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी), जुबैर गोपालानी, (अध्यक्ष अल्पसंख्यक विकास और संरक्षण फाउंडेशन), कमाल फारुकी (सदस्य, आल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड) एवं अन्य गणमान्य अथिति भी शामिल थे।

जमीयत उलेमा ए हिंद

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