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एनएचआरसी ने सभी राज्यों को निर्देश दिया—मानकों का उल्लंघन करने वाली स्लीपर बसें तुरंत सड़कों से हटाई जाएं

वीना टंडन
नई दिल्ली, । राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली सभी स्लीपर कोच बसों को तुरंत सड़क से हटाया जाए और उनके संचालन पर रोक सुनिश्चित की जाए। आयोग ने कहा है कि बसों की डिजाइन और अनुमोदन में हो रही प्रणालीगत लापरवाही यात्रियों की जान खतरे में डाल रही है।

यह निर्देश उस शिकायत के जवाब में जारी किया गया है, जो राजस्थान के जैसलमेर–जोधपुर राजमार्ग पर 14 अक्टूबर 2025 को हुई स्लीपर बस आग की घातक घटना को लेकर की गई थी। घटना की जांच करने वाले केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (CIRT) ने अपनी रिपोर्ट में अनिवार्य AIS-052 और AIS-119 सुरक्षा मानकों के कई उल्लंघन उजागर किए हैं, जिनमें आग बुझाने की प्रणाली का अभाव और बस की आंतरिक संरचना में खतरनाक डिजाइन खामियां शामिल हैं।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कई स्लीपर बसों में चालक का केबिन पूरी तरह से यात्री कक्ष से अलग कर दिया जाता है, जिससे आग जैसी आपात स्थिति का समय पर पता नहीं चल पाता और न ही अंदर बैठे यात्री चालक को अपनी स्थिति से अवगत करा पाते हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार बसों में बार-बार होने वाली आग की घटनाओं में कई मौतें टल सकती थीं, यदि डिजाइन मानकों का सही पालन किया जाता।

शिकायतकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि ऐसा असुरक्षित डिजाइन संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन है और यह बस निर्माताओं तथा अनुमोदन एजेंसियों की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। आयोग ने कहा कि पीड़ितों और उनके परिवारों को मुआवजा सुनिश्चित करने तथा सुरक्षा डिजाइन में सुधार के लिए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

एनएचआरसी ने रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के सचिव और CIRT, पुणे के निदेशक को नोटिस जारी कर आरोपों की जांच कर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी जाए। आयोग ने MoRTH से देशभर में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने, गैर-अनुपालन बसों को वापस बुलाने और अनुमोदन अधिकारियों की भूमिका पर आपराधिक जांच शुरू करने को भी कहा है।

AIS-052 और AIS-119 वे अनिवार्य सुरक्षा मानक हैं, जिन्हें ARAI ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत बसों की संरचना और अग्नि सुरक्षा के लिए तैयार किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन मानकों का सख्ती से पालन ही भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोक सकता है।

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