
खनन टायरों में भारत की आत्मनिर्भरता को रफ्तार, असेन्सो का 100 मिलियन डॉलर निवेश
ग्रेटर नोएडा। भारत में कोयला, लौह अयस्क और महत्वपूर्ण खनिजों के खनन का विस्तार होने के बीच ऑफ-हाईवे टायर निर्माता असेन्सो टायर्स ने देश में विशाल माइनिंग टायरों की निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। कंपनी अपने भारत-निर्मित ऑल-स्टील रेडियल ऑफ-द-रोड (ROTR) पोर्टफोलियो को 49-इंच के विशाल माइनिंग टायरों तक विस्तार दे रही है। इसके साथ ही प्रमुख खनन क्षेत्रों में फील्ड एप्लीकेशन इंजीनियर्स की तैनाती और 2027-28 तक का बहु-वर्षीय प्रौद्योगिकी रोडमैप भी तैयार किया गया है।
कंपनी के मुताबिक भारत के खनन क्षेत्र में तेजी से हो रहे विस्तार के कारण भारी मशीनरी के अपटाइम, उत्पादकता, ईंधन दक्षता, सुरक्षा और परिचालन लागत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और राजस्थान जैसे प्रमुख खनन क्षेत्रों में ऑपरेटर बड़े और अधिक मशीनीकृत बेड़ों के साथ काम कर रहे हैं। ऐसे में टायर अब महज उपभोग्य वस्तु नहीं, बल्कि मशीनों के प्रदर्शन और कुल परिचालन लागत को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण परिसंपत्ति बनते जा रहे हैं।
आयातित बड़े टायरों का घरेलू विकल्प
असेन्सो का कहना है कि बड़े प्रारूप वाले माइनिंग टायरों की आपूर्ति लंबे समय से काफी हद तक विदेशी निर्माताओं पर निर्भर रही है। कंपनी भारत में डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण के जरिए इस अंतर को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 25-इंच के टायरों से शुरू हुआ उसका माइनिंग पोर्टफोलियो अब 49-इंच के विशाल टायरों तक पहुंच गया है, जबकि इससे भी बड़े आकार विकसित किए जा रहे हैं।
उत्पादन क्षमता पर 100 मिलियन डॉलर का निवेश
इस विस्तार के लिए कंपनी भारत स्थित अपने उत्पादन संयंत्र में विश्वस्तरीय ऑल-स्टील रेडियल टायर निर्माण क्षमता विकसित करने पर 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च करेगी। निवेश में आधुनिक विनिर्माण ढांचा, रेडियल उत्पादन तकनीक, उत्पाद विकास एवं परीक्षण क्षमता, इंजीनियरिंग प्रतिभा और भविष्य में क्षमता विस्तार शामिल है। कंपनी के अनुसार इन क्षमताओं को भारत में ही विकसित और संचालित किया जाएगा।
खदानों में सीधे पहुंचेगी इंजीनियरिंग टीम
असेन्सो ने ग्राहकों के साथ जमीन पर काम करने के लिए भारत समेत प्रमुख वैश्विक खनन बाजारों में 15 से अधिक समर्पित फील्ड एप्लीकेशन इंजीनियर्स तैनात करने की योजना बनाई है। ये विशेषज्ञ खदानों में टायरों के प्रदर्शन और घिसाव की निगरानी करेंगे, स्थानीय परिचालन परिस्थितियों का अध्ययन करेंगे और प्राप्त आंकड़ों को कंपनी के वैश्विक अनुसंधान एवं विकास संगठन तक पहुंचाएंगे।
2027-28 तक नए आकार और डिजाइन
कंपनी की रेडियल OTR यात्रा 2023 के अंत में शुरू हुई थी। इसके बाद कंपनी ने रेडियल माइनिंग टायरों के लिए विशेष इंजीनियरिंग और आरएंडडी टीम तैयार की। कंपनी के अनुसार 2027 और 2028 तक विशाल माइनिंग टायरों, विशेष ट्रेड पैटर्न और बड़े व्हील व्यास के साथ पोर्टफोलियो का विस्तार किया जाएगा। इसका दायरा खनन के अलावा अर्थमूविंग और लोडर अनुप्रयोगों तक भी रहेगा।
असेन्सो टायर्स के प्रबंध निदेशक योगेश महानसारिया ने कहा कि भारत के बढ़ते खनन क्षेत्र को उसी स्तर की क्षमता वाले टायरों की जरूरत है। उनके मुताबिक 100 मिलियन डॉलर का निवेश केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि भारत में विश्वस्तरीय रेडियल माइनिंग टायर इंजीनियरिंग और निर्माण क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी धवल नानावटी ने कहा कि झारखंड और ओडिशा के कोयला क्षेत्रों से लेकर छत्तीसगढ़ और कर्नाटक के लौह अयस्क क्षेत्रों तक फील्ड इंजीनियरों की तैनाती से वास्तविक परिचालन परिस्थितियों को समझने और उत्पाद विकास में उनका उपयोग करने में मदद मिलेगी। उन्होंने 49-इंच के भारत में इंजीनियर किए गए विशाल माइनिंग टायरों को कंपनी के साथ-साथ भारतीय विनिर्माण क्षमता के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
प्रदर्शन के साथ प्रतिस्पर्धी कीमत पर जोर
असेन्सो अपनी रेडियल OTR रणनीति को प्रतिस्पर्धी कीमत पर प्रीमियम प्रदर्शन के सिद्धांत पर आगे बढ़ा रही है। कंपनी के अनुसार उसके रेडियल OTR टायरों को डिजाइन, इंजीनियरिंग और परीक्षण के दौरान स्थापित वैश्विक प्रीमियम ब्रांडों के मुकाबले बेंचमार्क किया जाता है।
कंपनी ने 2027-28 तक का रोडमैप तैयार किया है, जिसके तहत खनन, अर्थमूविंग और लोडर क्षेत्र के लिए नए आकार और ट्रेड पैटर्न लगातार जोड़े जाएंगे।




