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बारिश, लालच और लापरवाही ने ली छह जानें!

सत्य निकेतन में ‘हॉस्टल डेज’ इमारत ढही, छह की मौत, चार घायल; बेसमेंट में चल रहा था काम मलबे में छात्रों के दबे होने की आशंका, रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन; मुख्यमंत्री ने दिए मजिस्ट्रेट जांच और एफआईआर के आदेश

वीना टंडन
नई दिल्ली। राजधानी के सत्य निकेतन इलाके में पेइंग गेस्ट के तौर पर इस्तेमाल की जा रही ‘हॉस्टल डेज’ इमारत के ढहने की घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार अन्य घायल हुए हैं। घायलों में से एक को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। रातभर मलबे में फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान जारी रहा। अधिकारियों को आशंका है कि मलबे के नीचे छात्रों समेत कई लोग दबे हो सकते हैं।

बताया जा रहा है कि लगातार हो रही बारिश के कारण इमारत की हालत पहले से खराब थी। जगह-जगह ईंटें दिखाई देने लगी थीं और इमारत के कमजोर होने की स्थिति में पहुंचने की बात सामने आई है। इसी दौरान इमारत के मालिक हरिराम बंसल ने इसमें रेनोवेशन का काम शुरू कराया। दिल्ली विश्वविद्यालय के नजदीक होने के कारण अगस्त में बड़ी संख्या में छात्र यहां रहने पहुंचे थे। इमारत में छात्रों के रहने की व्यवस्था किए जाने के बावजूद मरम्मत का काम जारी था।

बेसमेंट में पानी के बीच जारी था काम

हादसे के वक्त इमारत के बेसमेंट में काम चल रहा था। स्थानीय लोगों के मुताबिक बेसमेंट में बारिश का पानी भी भर गया था, इसके बावजूद मजदूर वहां काम करते रहे। इसी दौरान अचानक पूरी इमारत भरभराकर गिर गई। बचाव दल ने 11 लोगों को मलबे से बाहर निकाला, जिनमें दो मजदूर भी शामिल थे। इनमें से एक मजदूर की मौत हो गई।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बारिश के दौरान भी बेसमेंट में मजदूरों से काम कराया जा रहा था। इलाके में बेसमेंट में पानी भरना आम समस्या होने के बावजूद कथित तौर पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीरता नहीं बरती गई।

करीब 30 कमरों में रहने वाले थे छात्र

‘हॉस्टल डेज’ नाम की इस इमारत में करीब 30 कमरे बताए जा रहे हैं। प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्रों के रहने की योजना थी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस इमारत का मूल इस्तेमाल रिहायशी था, उसे कथित तौर पर छात्रों के लिए हॉस्टल/पीजी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके साथ ही रेनोवेशन के दौरान छात्रों के रहने और बेसमेंट में निर्माण कार्य जारी रहने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

मालिक के खिलाफ एफआईआर के आदेश

घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंचीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को इमारत ढहने के कारणों की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने इमारत के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को भी कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस गंभीर घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी और कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होगी। हादसे के बाद अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जर्जर हालत में पहुंच चुकी इमारत में छात्रों के रहने और निर्माण कार्य जारी रहने की अनुमति कैसे बनी रही।

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