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ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा दांव: पीएम मोदी UAE रवाना, LPG और तेल भंडार पर हो सकते हैं अहम समझौते

वीना टंडन
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi शुक्रवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के लिए रवाना हो गए। आबू धाबी में प्रधानमंत्री की मुलाकात यूएई के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan से होगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत होने की संभावना है।

सूत्रों के मुताबिक भारत और यूएई के बीच लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सप्लाई और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जुड़े दो बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। माना जा रहा है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह दौरा भारत की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि दोनों देशों के नेता द्विपक्षीय संबंधों, ऊर्जा सहयोग, निवेश और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का मुख्य फोकस ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना बताया जा रहा है।

दरअसल, ईरान से जुड़े तनाव और युद्ध जैसे हालात के चलते वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका असर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति पर भी देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर नए विकल्पों पर तेजी से काम कर रहा है। यूएई पहले से ही भारत का महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार रहा है और अब दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की तैयारी है।

जानकारों का मानना है कि यूएई द्वारा तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC से बाहर निकलने के फैसले के बाद क्षेत्रीय ऊर्जा समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। ऐसे में भारत और यूएई के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी भविष्य में दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब देश में ऊर्जा बचत को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। दूसरी ओर रूस से तेल खरीद पर अमेरिका द्वारा दी गई छूट 16 मई तक ही लागू है। यदि अमेरिका इस छूट को आगे नहीं बढ़ाता है तो भारत को रूसी कच्चे तेल के आयात में कटौती करनी पड़ सकती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार भारत ने अमेरिका से रूसी तेल पर दी गई छूट बढ़ाने का अनुरोध किया है। नई दिल्ली का कहना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता जारी रहती है तो इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। हालांकि विदेश मंत्रालय और अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से इस पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का यूएई दौरा केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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