
राष्ट्रपति मैक्रों का आह्वान: “अपना विश्वसनीय AI सिस्टम विकसित करें, बाहरी तकनीक पर निर्भरता कम करें”
वीना टंडन
नई दिल्ली: भारत और फ्रांस के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मस्तिष्क स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने के लिए आज एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की गई। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दोनों देशों से आग्रह किया कि वे अपना स्वयं का विश्वसनीय AI सिस्टम विकसित करें ताकि विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम की जा सके।
प्रमुख संस्थानों का अनूठा सहयोग
इस पहल के तहत AIIMS दिल्ली, सोरबोन यूनिवर्सिटी और पेरिस ब्रेन इंस्टीट्यूट के बीच एक संयुक्त समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें IIT दिल्ली और अन्य फ्रांसीसी संस्थान भी साझेदार के रूप में शामिल हैं। इसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, न्यूरोसाइंस और सार्वजनिक स्वास्थ्य के संगम पर अंतर-विषयक अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
ब्रेन हेल्थ और क्लिनिकल नवाचार पर जोर
केंद्र विशेष रूप से मस्तिष्क स्वास्थ्य और वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों में AI-संचालित अनुसंधान, चिकित्सा शिक्षा और क्लिनिकल नवाचार पर ध्यान देगा। राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा, “भारत और फ्रांस अपनी कंप्यूटिंग क्षमता और प्रतिभा विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम केवल बाहरी तकनीकों पर भरोसा नहीं कर सकते।”
जिम्मेदार और पारदर्शी AI की वकालत
मैक्रों ने AI के शासन में जिम्मेदारी और पारदर्शिता को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि AI को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए काम करना चाहिए और एल्गोरिदम में भेदभाव को दूर करना जरूरी है। भाषाई और सांस्कृतिक विविधता की सुरक्षा के प्रति दोनों देशों की दृढ़ प्रतिबद्धता है।
शिक्षा और छात्रों के लिए बड़ा ऐलान
राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत और फ्रांस के बीच शैक्षणिक गतिशीलता (Academic Mobility) बढ़ाने की योजना भी घोषित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर उन्होंने 2030 तक 30,000 भारतीय छात्रों को फ्रांस में स्वागत करने का लक्ष्य रखा। फ्रांस वीजा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाएगा, विशेष रूप से PhD जैसी लंबी अवधि वाले कार्यक्रमों के लिए।
इस अवसर पर मैक्रों ने युवा भारतीय नवाचारकों प्रियंका दास राजकाकती और मनन सूरी के साथ ‘RUSH 2026’ बैठक में भी संवाद किया। उन्होंने कहा कि युवा ही समावेशी AI इकोसिस्टम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


