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सार्वजनिक हित में एआई का उपयोग दिखाने का मंच बना ‘भारत एआई इम्पैक्ट समिट’

वीना टंडन
नई दिल्ली।“भारत एआई इम्पैक्ट समिट का उद्देश्य यह दिखाना है कि एआई का उपयोग सार्वजनिक हित में कैसे किया जा सकता है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट को लेकर अपने संदेश में यह बात कही। उन्होंने अपने पोस्ट में एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया, जिसका भावार्थ है— सुनने की इच्छा, ध्यानपूर्वक सुनना, समझना, स्मरण रखना, तर्क करना, निर्णय लेना, अर्थ ग्रहण करना और सिद्धांतों का ज्ञान— ये सभी बुद्धि के गुण हैं और यही बुद्धिमत्ता की नींव रखते हैं।
समिट के पहले दिन सोमवार को प्रधानमंत्री ने एक्सपो का उद्घाटन करते हुए जिम्मेदार और समावेशी एआई के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उद्घाटन के बाद उन्होंने प्रदर्शनी में भाग ले रहे स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों से संवाद किया। इन प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, जलवायु और प्रशासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में एआई के व्यावहारिक उपयोगों का प्रदर्शन किया।
प्रधानमंत्री 19 फरवरी को समिट का उद्घाटन भाषण देंगे। माना जा रहा है कि उनका संबोधन वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने और भारत के समावेशी, विश्वसनीय व विकासोन्मुख एआई दृष्टिकोण को नई दिशा देगा।
समिट में 13 देशों के पवेलियनों के माध्यम से एआई पारिस्थितिकी तंत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रदर्शित किया गया है। इनमें ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, सर्बिया, एस्टोनिया, ताजिकिस्तान और कई अफ्रीकी देशों की भागीदारी शामिल है।
कार्यक्रम में 300 से अधिक चयनित प्रदर्शनी पवेलियन और लाइव डेमोंस्ट्रेशन आयोजित किए जा रहे हैं। एआई के प्रभाव को तीन प्रमुख ‘चक्रों’— लोग, ग्रह और प्रगति— के माध्यम से प्रस्तुत किया जा रहा है।
समिट में 600 से अधिक उच्च क्षमता वाले स्टार्टअप्स भाग ले रहे हैं, जिनमें से कई पहले ही वास्तविक दुनिया में लागू किए जा चुके एआई समाधान विकसित कर चुके हैं। यह आयोजन भारत को वैश्विक एआई नवाचार और सहयोग के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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