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विश्व पुस्तक मेले 2026 में पाठकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है सावन कृपाल रूहानी मिशन का स्टॉल

वीना टंडन
नई दिल्ली।नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा नई दिल्ली स्थित प्रगति मैदान में 10 से 18 जनवरी, 2026 तक आयोजित किए जा रहे विश्व पुस्तक मेले में प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग भाग ले रहे हैं। यह मेला पुस्तकों में रूचि रखने वाले लोगों के लिए एक महाकुंभ के समान उभरकर आया है, जहां वे विभिन्न प्रकार की पुस्तकों को खरीदकर अपना ज्ञान बढ़ा रहे हैं।
इस विश्व पुस्तक मेले में सावन कृपाल रूहानी मिशन ने हॉल न. 3 के स्टॉल नंबर एम-2 पर मेडिटेशन, अध्यात्म, ध्यान-अभ्यास द्वारा आंतरिक एवं बाहरी शांति, सदाचारी जीवन, वक्त के पूर्ण गुरु का हमारे जीवन में महत्त्व, बच्चों के लिए प्ररेणादायक पुस्तकें, संतों-महापुरुषों के जीवन चरित्र, व जीवन में शाकाहार का महत्त्व आदि विषयों पर आध्यात्मिक पुस्तकों की बहुत बड़ी श्रृंखला पेश की है, जिसके कारण यह स्टॉल इस पुस्तक मेले में आए सभी पाठकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
सावन कृपाल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित संत राजिन्दर सिंह जी महाराज की प्रमुख पुस्तकें जोकि विश्वभर में अध्यात्म के क्षेत्र में सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तकों में शामिल हैं, जिनमें, ’मन का शुद्धिकरण’ ’मंज़िले-महबूब’ ’मेडिटेशन एज़ मेडिकेशन फॉर द सोल’, ’दिव्य चिंगारी’, ’आत्म शक्ति’ तथा ’ध्यान-अभ्यास द्वारा अंतरीय व बाह्य शांति’ आदि शामिल हैं, जोकि इस पुस्तक मेले में सभी पुस्तक प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
न सिर्फ युवाओं व बुजुर्गों बल्कि बच्चों के जीवन को सही दिशा देने के लिए भी संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने कई पुस्तकों की रचना की है, जैसे ’टेंडर हैंड्स‘, ’टेंडर हार्ट्स‘ और ’द मैथ ऑफ शेयरिंग जैसी पुस्तकें बच्चों को एकाग्रता, करुणा और नैतिक गुणों की गहरी समझ विकसित करने में उनकी मदद करते हुए उन्हें जीवन जीने के आवश्यक सबक भी सिखाती हैं।
संत राजिन्दर सिंह जी महाराज एक विश्व-विख्यात आध्यात्मिक गुरु, ध्यान-अभ्यास के शिक्षक, सावन कृपाल रूहानी मिशन के प्रमुख और सुप्रसिद्ध लेखक भी हैं। संत राजिन्दर सिंह जी महाराज द्वारा लिखित ये अमूल्य व दुर्लभ पुस्तकें न सिर्फ हमारे जीवन का मार्गदर्शन करती हैं बल्कि इनके द्वारा हमारी समझ भी ठीक होती है, जिससे कि हम अपने जीवन में सही निणर्य ले पाते हैं।
संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने ध्यान-अभ्यास के द्वारा प्रेम और एकता का संदेश फैलाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। उनकी शिक्षाएं प्रभु की ज्योति और श्रुति का अनुभव करने के लिए सभी लोगों को ध्यान-अभ्यास करने के महत्व पर जोर देती हैं। यह एक ऐसी तकनीक है जोकि हमें दैनिक जीवन की तकलीफों से निकालकर एक सच्ची आध्यात्मिक पूर्णता का अनुभव करने में मदद करती है। आज दुनियाभर के लाखों लोग संत राजिन्दर सिंह जी महाराज से ध्यान-अभ्यास की विधि सीखकर पिता-परमेश्वर की ज्योति और श्रुति का अनुभव स्वयं अपने अंदर कर रहे हैं।
सावन कृपाल रूहानी मिशन के प्रमुख संत राजिन्दर सिंह जी महाराज आज संपूर्ण विश्व में उन्हीं की तालीम को ध्यान-अभ्यास के द्वारा प्रेम, एकता व शांति का संदेश देकर प्रसारित कर रहे हैं, जिसके फलस्वरूप उन्हें भी विभिन्न देशों द्वारा अनेक शांति पुरस्कारों व सम्मानों के साथ-साथ पाँच डॉक्टरेट की उपाधियों से भी सम्मानित किया जा चुका है।
सावन कृपाल रूहानी मिशन के आज संपूर्ण विश्व में 3400 से अधिक केन्द्र स्थापित हैं तथा मिशन का साहित्य विश्व की 56 से अधिक भाषाओं में प्रकाशित हो चुका है। इसका मुख्यालय विजय नगर, दिल्ली में है तथा अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय नेपरविले, अमेरिका में स्थित है।

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