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मालवीय नगर अग्निकांड: जब मौत बरसा रही थी आग, तब इंसानियत बनकर सामने आए मोहल्ले के युवक

नई दिल्ली। मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। शनिवार सुबह करीब 8:48 बजे एक बहुमंजिला इमारत में लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया। हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 15 से अधिक विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं, जबकि 40 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह रसोईघर में हुआ शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है।

इस भयावह मंजर के बीच कुछ ऐसे चेहरे भी सामने आए जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जिंदगी बचाने का बीड़ा उठाया। होटल में फंसे लोगों की चीख-पुकार सुनकर सबसे पहले आसपास के मोहल्ले के युवक मौके पर पहुंचे। रिहान, साजिद, मुबारक और उनके साथ कई अन्य युवकों ने बिना किसी सुरक्षा उपकरण और आधिकारिक मदद का इंतजार किए राहत कार्य शुरू कर दिया।

जब आग ने मुख्य रास्ते को अपनी चपेट में ले लिया और लोग खिड़कियों से लटककर जान बचाने की कोशिश कर रहे थे, तब युवकों ने आसपास की दुकानों से गद्दे और रजाइयां लाकर सड़क पर बिछा दीं। कुछ ही मिनटों में होटल के सामने अस्थायी सुरक्षा व्यवस्था तैयार कर दी गई, जिससे ऊपर की मंजिलों से कूदने वाले लोगों की जान बचाई जा सके।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवकों ने खिड़कियों के शीशे तोड़े, फंसे लोगों को बाहर निकलने का रास्ता दिखाया और लगातार उन्हें हिम्मत देते रहे। कई लोग घायल हुए, कुछ के हाथ-पैर टूटे, लेकिन वे सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। हर बची हुई जान के पीछे इन युवकों की बहादुरी और तत्परता की अहम भूमिका रही।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उस समय किसी ने यह नहीं देखा कि अंदर फंसा व्यक्ति किस धर्म या समुदाय से है। सभी ने सिर्फ इंसानियत का धर्म निभाया। कई पीड़ित अलग-अलग राज्यों और समुदायों से थे, लेकिन बचाव में जुटे युवकों के लिए उनकी पहचान सिर्फ इतनी थी कि वे मदद के मोहताज इंसान थे।

प्रत्यक्षदर्शियों का मानना है कि यदि स्थानीय नागरिक तुरंत सक्रिय नहीं होते तो मृतकों की संख्या और अधिक हो सकती थी। दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही मोहल्ले के लोगों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया था।

मालवीय नगर की इस त्रासदी ने जहां कई परिवारों को गहरा दर्द दिया है, वहीं स्थानीय युवकों की बहादुरी ने इंसानियत, साहस और सामाजिक एकता की ऐसी मिसाल पेश की है जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। इस हादसे ने एक बार फिर साबित किया कि मुश्किल की घड़ी में इंसानियत ही सबसे बड़ी पहचान होती है।हेडलाइन: मालवीय नगर अग्निकांड: आग के बीच फरिश्ता बने मोहल्ले के युवक, दर्जनों लोगों की बचाई जान

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