
टोल पर नहीं लगेंगे ब्रेक, अब इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से कटेगा पैसा साल भर में पूरे देश के हाईवे पर लागू होगी नई व्यवस्था
वीना टंडन
नई दिल्ली.लोकसभा के प्रश्नकाल में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि देश में टोल वसूली को पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि करीब दस स्थानों पर नई डिजिटल टोल व्यवस्था लागू की जा चुकी है और अगले एक वर्ष के भीतर इसे पूरे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर शुरू कर दिया जाएगा। इस प्रणाली के लागू होने के बाद वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे यात्रा का समय बचेगा और ट्रैफिक भी सुगम होगा।
गडकरी ने जानकारी दी कि देश में करीब 10 लाख करोड़ रुपये की लागत से 4,500 राजमार्ग परियोजनाओं पर काम चल रहा है। बड़े पैमाने पर हाईवे निर्माण और डिजिटल टोल सिस्टम के संयोजन से सड़क यातायात और परिवहन की रफ्तार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
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पूरी तरह डिजिटल होगा टोल सिस्टम
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (NETC) तकनीक विकसित की है, जिसके जरिए टोल सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है। इस तकनीक के तहत वाहनों की विंडस्क्रीन पर RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) टैग लगाया जाता है। वाहन जैसे ही टोल प्लाजा से गुजरता है, टैग सिस्टम चालक के बैंक खाते से स्वतः टोल राशि काट लेता है।
लोकसभा में चर्चा के दौरान गडकरी ने दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर कहा कि सरकार वैकल्पिक ईंधन को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन बताते हुए कहा कि इस दिशा में भी तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
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सड़क दुर्घटना पीड़ितों के कैशलेस उपचार पर भी जानकारी
केंद्रीय मंत्री ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के कैशलेस उपचार की योजना पर ताज़ा जानकारी देते हुए बताया कि अब तक कुल 6,833 अनुरोधों में से सिर्फ 5,480 पीड़ित ही पात्र पाए गए हैं। ‘सड़क दुर्घटना पीड़ित कैशलेस उपचार योजना 2025’ के तहत हर दुर्घटना मामले में पीड़ित को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
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