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दिल्ली में सिनेमा का महाकुंभ शुरू, 51 देशों की 178 फिल्मों के बीच उषा उथुप और रूना लैला का सम्मान

वीना टंडन
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सिनेमा का रंगीन और भव्य उत्सव शुरू हो गया है। 15वां दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 का शानदार आगाज़ 4 मई से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में हुआ, जहां देश-विदेश के फिल्मकारों, कलाकारों और सिने प्रेमियों का जमावड़ा देखने को मिल रहा है। 8 मई तक चलने वाला यह प्रतिष्ठित आयोजन इस बार और भी बड़े वैश्विक स्वरूप में सामने आया है, जिसमें 51 से अधिक देशों की 178 फिल्मों का प्रदर्शन और 100 से ज्यादा कलाकृतियों की प्रदर्शनी दर्शकों को आकर्षित कर रही है।
समारोह का उद्घाटन दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित विख्यात फिल्मकार अडूर गोपालकृष्णन ने किया। उद्घाटन समारोह में कई प्रमुख हस्तियों को सम्मानित भी किया गया, जिनमें वरिष्ठ गायिका उषा उथुप को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और बांग्लादेश की मशहूर गायिका रूना लैला को ‘मीनार-ए-दिल्ली’ अवॉर्ड से नवाजा गया। इसके अलावा प्रख्यात कलाकार जतिन दास को भी विशेष सम्मान दिया गया।
फिल्म समारोह में इस बार भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। वरिष्ठ अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की बंगाली फिल्म ‘पुरातन: द एनिशेंट’ खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जिसमें रितुपर्णा सेनगुप्ता की भूमिका को भी काफी सराहना मिल रही है। समारोह में श्वेता मेनन और मेघना मलिक सहित कई जानी-मानी हस्तियों की मौजूदगी भी चर्चा में है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस आयोजन में रूस की प्रमुख फिल्म संस्था रोस्किनो और मोजाम्बिक का राष्ट्रीय फिल्म संस्थान सहयोगी के रूप में जुड़े हैं, वहीं रूस, चीन और अफ्रीकी देशों की फिल्मों को विशेष फोकस दिया जा रहा है। पांच दिनों तक चलने वाला यह समारोह सिर्फ फिल्मों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि सिनेमा के जरिए सांस्कृतिक संवाद और वैश्विक सहयोग को भी नई दिशा देने का मंच बन रहा है।
समारोह में विश्व सिनेमा, भारतीय सिनेमा, एनआरआई सिनेमा, शॉर्ट फिल्म्स, डॉक्यूमेंट्री और रेट्रोस्पेक्टिव जैसे कई वर्ग बनाए गए हैं, जहां सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय मुद्दों पर आधारित फिल्मों को वैश्विक नजरिए से प्रस्तुत किया जा रहा है। खास बात यह है कि कई भारतीय फिल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं, जबकि कुछ अंतरराष्ट्रीय फिल्मों को ऑस्कर तक भेजा जा चुका है।
समारोह में प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रखा गया है, जिससे आम दर्शक भी विश्व सिनेमा का आनंद ले सकें। फिल्म पत्रकार अनुराग पुनेठा, समीक्षक प्रमोद कौंसवाल और रीमा दिनेश कपूर द्वारा फिल्मों का चयन किया गया है, जबकि ज्यूरी की कमान रमन चावला के हाथों में है।
फेस्टिवल के संस्थापक और अध्यक्ष रामकिशोर पारचा का कहना है कि इस बार का आयोजन सिनेमा और समाज के रिश्ते को और गहराई से समझने का प्रयास करेगा। उनके मुताबिक, यह मंच न सिर्फ फिल्मों को दिखाने का माध्यम है, बल्कि इंसान और उसके संघर्षों की कहानी को दुनिया के सामने रखने का एक सशक्त जरिया भी है। राजधानी में शुरू हुआ यह फिल्म महोत्सव सिनेमा प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है, जहां मनोरंजन के साथ-साथ विचार और संवेदना का भी अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।

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