
निवेश के नाम पर अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी, ब्रिटिश कंपनी के सीईओ से पौने आठ करोड़ की धोखाधड़ी
वीना टंडन
गुरुग्राम।निवेश के नाम पर साइबर ठगों ने गुरुग्राम-सोहना रोड स्थित सेक्टर-47 की मालिबू टाउन कॉलोनी निवासी एक ब्रिटिश कंपनी के सीईओ से करीब पौने आठ करोड़ रुपये की ठगी कर ली। यह मामला निवेश से जुड़े साइबर फ्रॉड के मामलों में अब तक की सबसे बड़ी धोखाधड़ी मानी जा रही है। शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गूगल विज्ञापन से शुरू हुआ जाल
पीड़ित 54 वर्षीय अश्वनी अवस्थी, केडार ड्राइव ब्लॉक, मालिबू टाउन कॉलोनी के निवासी हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि सितंबर 2025 में शेयर बाजार में निवेश के उद्देश्य से उन्होंने गूगल पर निवेश सेवाएं देने वाली कंपनियों की तलाश शुरू की थी। इसी दौरान उन्हें एक कंपनी का ऑनलाइन विज्ञापन मिला, जिसने खुद को निवेश में सहायता करने वाला विश्वसनीय मंच बताया।
जब अवस्थी ने इस कंपनी के बारे में जानकारी जुटाई तो उन्हें बताया गया कि देश के प्रख्यात उद्योगपति भी इस ऐप के माध्यम से निवेश कर रहे हैं। इसी आधार पर उन्होंने इस प्लेटफॉर्म पर भरोसा कर लिया।
पहले छोटी राशि, फिर बढ़ता निवेश
शिकायतकर्ता के अनुसार, ऐप के माध्यम से उन्हें एक लिंक भेजा गया, जिस पर क्लिक करने के बाद वे कंपनी के ग्रुप से जुड़ गए। उन्होंने बताया कि वे निवेश में नौसिखिए हैं, जिस पर उन्हें पहले छोटी राशि से निवेश शुरू करने की सलाह दी गई।
29 सितंबर से उन्होंने इस ऐप के जरिए ओटीसी और आईपीओ में निवेश करना शुरू किया और 1 जनवरी तक लगातार निवेश करते रहे। निवेश की पूरी प्रक्रिया ऐप और व्हाट्सऐप के जरिए संचालित की गई।
47 बैंक खातों में भेजी गई रकम
अवस्थी ने बताया कि खुद को कंपनी का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताने वाले लोगों ने उन्हें अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी भेजी, जिनमें उन्होंने निवेश के नाम पर रकम ट्रांसफर की। ठगों ने 47 अलग-अलग बैंक खातों में उनसे पैसे जमा करवाए।
ये बैंक खाते कर्नाटक, मुंबई, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, बेंगलुरु, पटना, लखनऊ, कोटा, गाजियाबाद, नागपुर समेत कई शहरों के बताए जा रहे हैं।
फर्जीवाड़े का ऐसे हुआ खुलासा
पीड़ित के अनुसार, इसी दौरान उन्हें श्रीनी विश्वनाथ के नाम से एक पत्र मिला, जिसमें उनसे एक करोड़ रुपये की सुरक्षा राशि जमा कराने को कहा गया और यह भरोसा दिलाया गया कि यह रकम दो दिन के भीतर वापस कर दी जाएगी। उन्होंने यह राशि भी जमा कर दी।
इसके बाद उनसे और पैसे जमा कराने की मांग की जाने लगी। 5 जनवरी को जब उन्होंने मुंबई में संपर्क किया, तब उन्हें पता चला कि न तो उनका नाम और न ही उनका खाता किसी असली कंपनी के निवेश रिकॉर्ड में दर्ज है। यहीं से पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
रकम निकालने पर मांगे गए अलग-अलग शुल्क
पीड़ित ने बताया कि श्रीनी विश्वनाथ और मीनाक्षी शर्मा नामक लोग लगातार उनके संपर्क में रहे। निवेश आवेदन की प्रक्रिया ऐप पर दिखाई जाती रही और जमा की गई रकम भी ऐप पर नजर आती रही, जिससे उन्हें कोई संदेह नहीं हुआ।
जब उन्होंने अपनी रकम निकालने का अनुरोध किया तो उनसे कभी टैक्स, कभी प्रोसेसिंग फीस तो कभी अन्य शुल्क के नाम पर अतिरिक्त राशि जमा करवाने को कहा गया।
पुलिस ने की अपील, रहें सतर्क
साइबर क्राइम पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि—
अनजान व्यक्ति यदि पार्सल में ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग या आधार के दुरुपयोग की बात करे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।
व्हाट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप में जोड़े जाने पर कारण पूछें, आवश्यकता न हो तो तुरंत ग्रुप छोड़ दें।
पुलिस, ट्राई, सीबीआई या ईडी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करने वालों से न डरें और कॉल काट दें।
शिकायत कैसे करें:
ठगी होने के 24 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर 1930 या नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
साइबर क्राइम पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए लेन-देन, बैंक खातों और डिजिटल प्लेटफॉर्म की गहन जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।


