
डिजिटल प्लेटफॉर्म की कमाई में हिस्सेदारी का मुद्दा गरमाया, एआई और डीपफेक पर सरकार सख्त
वीना टंडन
नई दिल्ली। डिजिटल कंटेंट से होने वाली भारी कमाई के बीच अब राजस्व बंटवारे में निष्पक्षता की मांग तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म विभिन्न श्रेणियों के रचनाकारों द्वारा अपलोड की गई सूचनाओं और वीडियो से बड़ा लाभ अर्जित करते हैं, ऐसे में कंटेंट क्रिएटर्स को उनका वाजिब हिस्सा मिलना चाहिए।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि दूरदराज के इलाकों में बैठे क्रिएटर्स, पारंपरिक मीडिया संस्थान, समाचार पेशेवर, प्रोफेसर और शिक्षाविद अपने शोध और कार्य के जरिए प्लेटफॉर्म को समृद्ध बनाते हैं। इसलिए राजस्व वितरण में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि ऐसा ढांचा तैयार किया जाता है तो भारत की डिजिटल कंटेंट इकोनॉमी को नई मजबूती मिलेगी।
डीपफेक और एआई कंटेंट पर सख्ती
सरकार डिजिटल सुरक्षा को लेकर भी सतर्क है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने आईटी नियम 2021 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य एआई-जनित फर्जी सूचनाओं और डीपफेक पर रोक लगाना है।
प्रस्तावित नियमों के तहत 50 लाख से अधिक भारतीय यूजर्स वाले बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म—जैसे Facebook, YouTube और Snapchat—को एआई से तैयार सामग्री पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा।
एआई कंटेंट में स्थायी मेटाडेटा शामिल करना होगा, जिसे हटाया या बदला न जा सके। साथ ही वीडियो या तस्वीरों के कम से कम 10 प्रतिशत हिस्से पर एआई पहचान का चिन्ह प्रदर्शित करना जरूरी होगा।
सरकार के इन प्रस्तावित कदमों को डिजिटल पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।


