
अवैध निर्माण हटाने पर पथराव, इलाके में भारी पुलिस बल तैनात
वीना टंडन
नई दिल्ली। तुर्कमान गेट स्थित जिस सैयद फैज इलाही मस्जिद और और कब्रिस्तान से सटी जमीन पर एमसीडी ने मंगलवार की देर रात बुलडोजर चला दिया, उसका दिल्ली ब्लास्ट से कनेक्शन है। इसी मजिस्द की प्रबंध समिति अतिक्रमण हटाने के एमसीडी के नोटिस के खिलाफ हाई कोर्ट भी गई है।
अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई के दौरान माहौल उस वक्त तनावपूर्ण हो गया, जब कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बीएनएस की धारा 163 लागू कर दी गई। इसके तहत चार से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगा दी गई है।
हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद नगर निगम (एमसीडी) और पुलिस की संयुक्त टीम ने आधी रात करीब 12 बजे दर्जनों बुलडोजर के साथ कार्रवाई शुरू की। पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मस्जिद और दरगाह के बाहर बने अवैध कब्जों को हटाया गया। इस दौरान अतिक्रमण वाली भूमि पर बने एक बारात घर और दो मंजिला डायग्नोस्टिक सेंटर को ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि केवल वही हिस्से हटाए गए, जिन्हें अवैध अतिक्रमण माना गया था।
नमाजियों की प्रतिक्रिया
कार्रवाई के दौरान कई नमाजियों को मस्जिद से अपना सामान निकालते देखा गया। उन्होंने बताया कि वे वर्षों से यहीं नमाज अदा करते आ रहे हैं। कुछ नमाजियों का कहना था कि तोड़ा गया हिस्सा मस्जिद परिसर से जुड़ा हुआ था, जहां पहले बैंक्वेट हॉल और डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित हो रहे थे। वहीं, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि उन्हें संतोष है कि मस्जिद सुरक्षित है, लेकिन फैसले को जल्दबाजी में लिया गया। नमाजियों ने मस्जिद में पानी की आपूर्ति बंद होने पर भी चिंता जताई, जिससे वजू करने में दिक्कत होगी।
प्रशासन का पक्ष
एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर विवेक अग्रवाल ने बताया कि यह कार्रवाई करीब छह घंटे तक चली और लगभग 80 प्रतिशत से अधिक काम पूरा कर लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। केवल दो मंजिला डायग्नोस्टिक सेंटर और बारात घर को हटाया गया है। करीब 36 हजार वर्ग फुट क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है।
डिप्टी कमिश्नर के अनुसार, मस्जिद कमेटी की ओर से जमीन के संबंध में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए थे। प्रशासन ने दोहराया कि यह पूरी कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश के तहत की गई है और मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित






