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दिल्ली में वादों का लेखा-जोखा: क्या बदला, क्या अब भी इंतज़ार में

वीना टंडन
स्टार न्यूज़ टेलिविजन विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली।दिल्ली में आम आदमी पार्टी के एक दशक लंबे शासन के बाद सत्ता की कमान संभालने वाली भाजपा सरकार ने कई मोर्चों पर तेज़ी दिखाई है। कुछ चुनावी वादे ज़मीन पर उतरते दिखे, तो कई बड़े ऐलान अब भी फाइलों में अटके हैं। लोकसत्य की यह रिपोर्ट बता रही है—खाना, स्वास्थ्य, गैस, सड़क, यमुना और प्रदूषण पर सरकार कहां तक पहुंची।
खाना और स्वास्थ्य: शुरुआत हुई, दायरा बढ़ा
राष्ट्रीय राजधानी में ‘आयुष्मान भारत’ को लागू करने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाए हैं। इसके साथ ही निर्माण श्रमिकों, दिहाड़ी मजदूरों और झुग्गीवासियों के लिए पांच रुपये में भोजन उपलब्ध कराने वाली ‘अटल कैंटीन’ की शुरुआत को सरकार अपनी उपलब्धि मान रही है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ और बुजुर्गों के लिए ‘वय वंदना योजना’ की शुरुआत हुई है। सरकार का दावा है कि निर्माणाधीन 11 अस्पताल परियोजनाओं के पूरा होने से 10,000 से अधिक बिस्तर सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में जुड़ेंगे।
कैश और गैस: बड़े वादे, छोटी प्रगति
चुनाव के दौरान खूब चर्चा में रही ‘महिला समृद्धि योजना’—जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को 2,500 रुपये मासिक सहायता देने का वादा किया गया था—अब भी लागू नहीं हो सकी है।
इसी तरह 500 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर और होली-दिवाली पर साल में दो मुफ्त सिलेंडर की घोषणा पर भी दिल्लीवासियों की निगाहें टिकी हैं। मुख्यमंत्री ने स्वयं माना है कि ये वादे फिलहाल कागज़ों तक सीमित हैं।
प्रशासनिक बदलाव: जिले बढ़े, जनसुनवाई तेज
शासन को आम लोगों के करीब लाने के लिए प्रशासनिक पुनर्गठन किया गया। दो नए जिले बनाए गए, जिससे दिल्ली में जिलों की कुल संख्या 13 हो गई।
मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास को ‘मुख्यमंत्री जन सेवा सदन’ का रूप देते हुए साप्ताहिक जनसुनवाई शुरू की, जिसे नागरिकों की शिकायतों के समाधान का मंच बताया जा रहा है।
प्रदूषण: उपाय हुए, राहत अस्थायी
सर्दियों में लौटने वाला वायु प्रदूषण अब भी सरकार की बड़ी चुनौती है।
‘पीयूसीसी नहीं तो ईंधन नहीं’ नियम, यांत्रिक सफाई, एंटी-स्मॉग गन और पानी छिड़काव जैसे कदमों से कुछ समय की राहत तो मिली, लेकिन समस्या जड़ से खत्म नहीं हो सकी।
शिक्षा और बजट: कानून और बड़े लक्ष्य
निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर लगाम के लिए सरकार ने ‘दिल्ली विद्यालय शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025’ पेश किया।
वित्तीय मोर्चे पर 2025-26 के लिए एक लाख करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिसमें सड़क, पेयजल और यमुना पुनरुद्धार पर खास जोर है।
लोक निर्माण विभाग ने मार्च 2026 तक 500 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत का लक्ष्य तय किया है।
सड़क और फ्लाईओवर: अटकी परियोजनियों में हलचल
लंबे समय से लंबित बारापुल्ला फेज-तीन और नंद नगरी फ्लाईओवर को पर्यावरण मंजूरी मिल चुकी है। वहीं, 55 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रिंग रोड कॉरिडोर की व्यवहार्यता समीक्षा शुरू हो गई है।
जलभराव से निपटने के लिए बहुप्रतीक्षित मुख्य जल निकासी योजना भी पेश की गई है।
यमुना: एजेंसियां जुड़ीं, कार्ययोजना बनी
यमुना की सफाई भाजपा के प्रमुख चुनावी मुद्दों में रही है। सरकार ने कई संस्थाओं को जोड़ते हुए 45 सूत्री कार्ययोजना तैयार की है।
दिल्ली जल बोर्ड की बकाया राशि वसूली के लिए पानी के बिल पर एकमुश्त विलंब शुल्क माफी का ऐलान भी किया गया है।
‘सेवा पखवाड़ा’ के तहत 1,800 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की शुरुआत को सरकार राजनीतिक मंशा से आगे बढ़ती कार्रवाई बता रही है।
आगे की राह
दिल्ली 2026 की दहलीज़ पर है। ऐसे में रेखा गुप्ता सरकार के सामने असली परीक्षा बाकी है—क्योंकि कई बड़े कल्याणकारी वादे अब भी अधूरे हैं और प्रदूषण, गैस, नकद सहायता जैसे मुद्दों पर जनता ठोस नतीजों का इंतज़ार कर रही है।
देखना होगा कि आने वाला साल वादों को हकीकत में बदल पाता है या नहीं।

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