Newsताज़ा तरीन खबरें

विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस के अवसर पर रायफल क्लब परिसर में सूचना विभाग ने लगाई भब्य प्रदर्शनी

बुलबुल पाण्डेय की रिपोर्टगा : जीपुर – सूचना विभाग की ओर से द्वारा विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस के अवसर पर रायफल क्लब परिसर में  प्रदर्शनी का आयोजन किया गया । इस दौरान मा0 राज्य सभा सांसद श्रीमती दर्शना सिंह, मा0 अध्यक्ष जिला पंचायत सपना सिंह, जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष सरिता अग्रवाल, पूर्व विधायक जमानियॉ सुनिता सिंह, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष विनोद अग्रवाल, जिला प्रभारी अशोक कुमार मिश्रा, जयप्रकाश गुप्ता एवं मुख्य विकास अधिकारी संतोष कुमार वैश्य और आमजनमान ने चित्र के माध्यन से प्रदर्शित  प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभाजन विभिषिका दिवस को याद किया।

14 अगस्त 1947 की तारीख भारत भला कैसे भूल सकता है। एक तरफ 200 वर्षों की गुलामी के बाद आजादी मिलने वाली थी तो वहीं दूसरी ओर देश के दो टुकड़े हो रहे थे। लाखों लोग इधर से उधर हो गए। घर-बार छूटा। परिवार छूटा। लाखों की जानें गईं. यह दर्द था, विभाजन का। भारत के लिए यह विभीषिका से कम नहीं थी। इसी दर्द को याद करते हुए पिछले साल आजादी की सालगिरह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने का बड़ा ऐलान किया था।

इसी परिप्रेक्ष्य में आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रमों के तहत आज सोमवार 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जा रहा है। 14 अगस्त 1947 को देश के बंटवारे के दौरान विस्थापन का दर्द झेलने वाले लोगों की याद में ये दिन मनाया जाता है। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस उन भारतवासियों को श्रद्धापूर्वक याद करने का अवसर है, जिनका जीवन देश के बंटवारे की बलि चढ़ गया। यह दिन उन लोगों के कष्ट और संघर्ष की भी याद दिलाता है, जिन्हें विस्थापन का दंश झेलने को मजबूर होना पड़ा। ऐसे सभी लोगों को देश शत-शत नमन कर रहा है।

बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो वर्ष पूर्व घोषणा की थी कि हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के तौर पर मनाया जाएगा। उन्होंने कहा था कि देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गंवानी पड़ी। यह दिन हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना के जहर को खत्म करने के लिए न केवल प्रेरित करेगा, बल्कि इससे एकता,सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाएं भी मजबूत होंगी।

1947 में देश ने आजादी पाई थी, मगर देश को दो टुकड़ों में बांटे जाने का जख्म भी झेलना पड़ा। भारत से कटकर पाकिस्तान नया देश बना और बाद में पाकिस्तान के पूर्वी हिस्से ने 1971 में बांग्लादेश के तौर पर एक नए देश की शक्ल ली।
भारत के इस भौगोलिक बंटवारे ने देश के लोगों को सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक व मानसिक रूप से तोड़कर रख दिया था। ऐसे में इस त्रासदी में प्राण गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देकर विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के आयोजन के जरिए भेदभाव, मनमुटाव, दुर्भावना को खत्म कर एकता, सामाजिक सद्भाव की भावना को बढ़ाया जा रहा है।

भारत का विभाजन देश के लिए किसी विभीषिका से कम नहीं थी। इसका दर्द आज भी देश को झेलना पड़ रहा है। ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन ने पाकिस्तान को 1947 में भारत के विभाजन के बाद एक मुस्लिम देश के रूप में मान्यता दी थी। लाखों लोग विस्थापित हुए थे और बड़े पैमाने पर दंगे भड़कने के चलते कई लाख लोगों की जान चली गई थी। इससे पहले ब्रिटिश हुकूमत से आजादी के लिए भी लाखों भारतीयों ने कुर्बानियां दी थीं। 14 अगस्त, 1947 की आधी रात भारत की आजादी के साथ देश का भी विभाजन हुआ और पाकिस्तान अस्तित्व में आया। विभाजन से पहले पाकिस्तान का कहीं नामो- निशान नहीं था। अंग्रेज जा तो रहे थे, लेकिन उनकी साजिश का फलाफल था, कि भारत को बांटकर एक अन्य देश खड़ा किया गया।

विभाजन की घटना को याद किया जाए तो 14 अगस्त, 1947 का दिन भारत के लिए इतिहास का एक गहरा जख्म है। वह जख्म तो आज तक ताजा है और भरा नहीं है। यह वो तारीख है, जब देश का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान एक अलग देश बना। बंटवारे की शर्त पर ही भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली।भारत-पाक विभाजन ने भारतीय उप महाद्वीप के दो टुकड़े कर दिए। दोनों तरफ पाकिस्तान (पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान) और बीच में भारत। इस बंटवारे से बंगाल भी प्रभावित हुआ। पश्चिम बंगाल वाला हिस्सा भारत का रह गया और बाकी पूर्वी पाकिस्तान। पूर्वी पाकिस्तान को भारत ने 1971 में बांग्लादेश के रूप में स्वतंत्र राष्ट्र बनाया।

देश का बंटवारा हुआ, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से नहीं। इस ऐतिहासिक तारीख ने कई खूनी मंजर देखे। भारत का विभाजन खूनी घटनाक्रम का एक दस्तावेज बन गया, जिसे हमेशा उलटना-पलटना पड़ता है। दोनों देशों के बीच बंटवारे की लकीर खिंचते ही रातों-रात अपने ही देश में लाखों लोग बेगाने और बेघर हो गए। धर्म-मजहब के आधार पर न चाहते हुए भी लाखों लोग इस पार से उस पार जाने को मजबूर हुए। इस अदला-बदली में दंगे भड़के, कत्लेआम हुए। जो लोग बच गए, उनमें लाखों लोगों की जिंदगी बर्बाद हो गई। भारत-पाक विभाजन की यह घटना सदी की सबसे बड़ी त्रासदी में बदल गई। यह केवल किसी देश की भौगोलिक सीमा का बंटवारा नहीं बल्कि लोगों के दिलों और भावनाओं का भी बंटवारा था। बंटवारे का यह दर्द गाहे-बगाहे हरा होता रहता है। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस इसी दर्द को याद करने का दिन है।

सूचना विभाग के लगाई गयी प्रदर्शनी के माध्यम से भारतीय इतिहास के काले अध्यायों में से एक अध्याय भारत विभाजन की त्रासदी है, जिसने भारत के दो टुकड़े कर हर भारतीय को गहरा आघात पहुंचाया, जिसने सदियों से कायम सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक एक सांस्कृतिक एकजुटता को पल भर में खण्डित कर दिया। भारत विभाजन की इस त्रासद स्मृति के बारे में भविष्य के नवजवान पीढ़ियों को बताने और उसके दुष्परिणाम को संज्ञानित करने के लिए शासन द्वारा भारत विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस का आयोजन देश के विभिन्न भागों में किया जा रहा है।

विभाजन की त्रासदी के दुष्परिणामों की स्मृतियों को भविष्य की पीढ़ियों, आमजनागरिकों, को परिचित कराने हेतु एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसमें देश के विभाजन के परिणामस्वरूप नागरिकों ने किन-किन यातनाओं को सहा, इसका सम्पूर्ण चित्रण इसमें किया गया था,।

मुख्य विकास अधिकारी संतोष कुमार वैश्य ने इस मौके पर विभाजन की त्रासदियों के दुष्परिणामों से उपस्थित भावी पीढ़ियों को अवगत कराया और कहा कि हमें अग्रेजों ने धर्म के आधार पर एक दूसरे से पृथक कर दिया था, उसी के परिणामस्वरूप हमारे देश का विभाजन हुआ। हमें इस चीज से सीख लेनी चाहिए कि आपसी फूट और वैमनुस्य सदैव विघटनकारी होती है और अब हमें उसी से सीख लेकर एकजुट रहना है। बीता हुआ समय हमें यह सीख देता है कि आने वाले समय में हम उन गलतियों को न करें, जो हमने पूर्व में किया है।

हम सबको जाति, मजहब जैसे चीजों से परे रहकर हमेशा एकजुट हरना है, जिससे सशक्त राष्ट्र का निर्माण होगा। हमारा देश विविधताओं वाला देश है, लेकिन इसके बावजूद भी हम एक है, और इसका एहसास हमें सदैव रहना चाहिए, तभी इस महान राष्ट्र की अखण्डता बनाये रखेंगें। इस कार्यक्रम में अखिलेश सिंह, प्रवीण सिंह, ओमप्रकाश राय, विजय शंकर राय, कार्तिक गुप्ता, पीयूष राय, अभिनव सिंह छोटू, अविनाश सिंह आदि लोग उपस्थित रहें।

स्टार न्यूज टेलिविज़न गाजीपुर ब्यूरो

StarNewsHindi

All news article is reviewed and posted by our Star News Television Team. If any discrepancy found in any article, you may contact [email protected] or you may visit contact us page

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button