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नाराज फूफा’ को रास नहीं आ रही 7.8% की रफ्तार! पीएम मोदी बोले- झूठ की गूंज नहीं, सत्य की हुंकार जीतेगी

वीना टंडन
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि दर और देश में हो रहे विकास कार्यों को लेकर सरकार की आलोचना करने वालों पर तीखा हमला बोला। श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी ने 7.8 प्रतिशत की तिमाही जीडीपी वृद्धि दर का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग कभी भारत को ‘फ्रैजाइल फाइव’ यानी कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं में गिनते थे, वे आज देश की तेज आर्थिक प्रगति को पचा नहीं पा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की प्रगति से चिढ़ने वाले लोग लगातार ‘झूठ का अभियान’ चला रहे हैं, लेकिन अंततः सत्य की शक्ति ही विजयी होगी। उन्होंने कहा कि यूरोप और पश्चिम एशिया में जारी युद्धों तथा वैश्विक भू-राजनीतिक संकटों के बीच भी भारत ने मजबूत विकास दर हासिल की है।

‘आग लगे तब जागना, सूखा पड़े तब कुआं खोदना’ वाली सोच बदली

पीएम मोदी ने पिछली सरकारों के कामकाज के तरीके पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनका स्टाइल ‘आग लगने पर ही जागना और सूखा पड़ने पर ही कुआं खोदना’ था। उन्होंने कहा कि 2014 में सरकार बनने के बाद इस पुराने रवैये को बदलकर देश में पहले से तैयारी और दीर्घकालिक विकास पर जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने वर्ष 2013 के अपने भाषण को याद करते हुए कहा कि उस समय ‘मेड इन इंडिया’ का मजाक उड़ाया जाता था और इसे असंभव बताया जाता था। आज दुनिया ‘मेक इन इंडिया’ की ब्रांड वैल्यू देख रही है।

हर काम पर ‘इसकी क्या जरूरत है’ पूछने वालों पर निशाना

विपक्ष पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कुछ लोगों की तुलना परिवार के ‘नाराज फूफा’ से की। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का काम हर अच्छी पहल पर सवाल उठाना है और उन्हें हर चीज में कमी ही नजर आती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब देश में बुलेट ट्रेन, यूपीआई, चिप निर्माण, नई संसद, वीर सैनिकों के स्मारक और दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा जैसे प्रोजेक्ट आगे बढ़ाए जा रहे थे, तब भी यही लोग पूछते थे कि ‘इसकी क्या जरूरत है?’ उन्होंने कहा कि भारत ने ऐसे लोगों को जवाब दे दिया है कि देश के विकास के लिए जो जरूरी है, उसे करने से भारत को कोई रोक नहीं सकता।

जीडीपी पर सवाल उठाने वालों को भी घेरा

पीएम मोदी ने कहा कि जिन लोगों ने जनधन योजना से लेकर मेक इन इंडिया तक सरकार की विभिन्न पहलों का विरोध किया, वही आज जीडीपी के आंकड़ों पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने आलोचकों को निराशावादी बताते हुए कहा कि देश की उपलब्धियों को कमतर आंकने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं, लेकिन भारत की विकास यात्रा इससे रुकने वाली नहीं है।

उन्होंने कहा कि ‘झूठ की गूंज’ कितनी भी तेज क्यों न हो, अंत में ‘सत्य की हुंकार’ ही प्रबल होगी और सच्चाई की जीत होगी।

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