
दिल्ली में जुटेंगे BRICS देशों के सुरक्षा प्रमुख, आतंकवाद और साइबर खतरों पर बनेगी साझा रणनीति राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे अहम बैठक की अध्यक्षता
साइबर सुरक्षा, आतंकवाद और वैश्विक चुनौतियों पर होगा मंथन चीन, रूस और ईरान समेत कई देशों के शीर्ष प्रतिनिधि होंगे शामिल
वीना टंडन
नई दिल्ली। वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के लगातार बदलते स्वरूप के बीच नई दिल्ली में BRICS देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है। भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहे भारत ने बैठक का मुख्य फोकस गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों पर रखा है। इनमें साइबर सुरक्षा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की सुरक्षा, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते खतरे और नई तकनीकों से उत्पन्न जोखिम प्रमुख रूप से शामिल हैं।
साइबर सुरक्षा बनेगी प्रमुख एजेंडा
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में साइबर हमलों, डेटा चोरी और ऑनलाइन अपराधों में तेजी से वृद्धि हुई है। ऐसे में BRICS देशों के बीच तकनीकी सहयोग और सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। बैठक में सूचना सुरक्षा और आधुनिक तकनीकों के सुरक्षित उपयोग को लेकर साझा रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना है।
कई बड़े देशों की नजर दिल्ली पर
सम्मेलन में BRICS सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी भाग लेंगे। जानकारी के अनुसार, चीन के विदेश मंत्री ****, रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव **** तथा ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हो सकते हैं। चीन पहले ही वांग यी की भारत यात्रा की पुष्टि कर चुका है। उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ अलग से द्विपक्षीय मुलाकात भी हो सकती है।
आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी होगी चर्चा
सूत्रों के मुताबिक सम्मेलन में सीमा पार आतंकवाद, पश्चिम एशिया की स्थिति, रूस-यूक्रेन संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। भारत इस मंच पर आतंकवाद के खिलाफ अपनी चिंताओं को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े विषय भी एजेंडे का हिस्सा बन सकते हैं।
सुरक्षा सहयोग को मिलेगी नई दिशा
बैठक में BRICS के आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सुरक्षा समूह की हालिया बैठकों की समीक्षा भी की जाएगी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाकर आतंकवाद, साइबर अपराध और अन्य उभरती सुरक्षा चुनौतियों का सामूहिक समाधान तैयार करना है।
मतभेदों के बीच सहमति की चुनौती
हालांकि BRICS देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद भी बने हुए हैं। हाल ही में हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में कुछ विषयों पर सहमति नहीं बनने के कारण संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका था। ऐसे में नई दिल्ली की यह बैठक इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि सदस्य देश सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर कितनी साझा समझ विकसित कर पाते हैं।
विश्लेषकों के अनुसार यह सम्मेलन आगामी BRICS शिखर सम्मेलन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता का विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा है। अब 11 सदस्य देशों वाला BRICS समूह वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के क्षेत्र में एक प्रभावशाली मंच के रूप में उभर चुका है।







