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अफगानिस्तान पर बदला भारत का रुख, संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंध व्यवस्था में बदलाव की मांग

वीना टंडन
नई दिल्ली, । भारत ने अफगानिस्तान की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों को स्वीकार करते हुए संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा प्रतिबंध व्यवस्था में बदलाव की वकालत की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि केवल दंडात्मक उपायों के सहारे अफगानिस्तान में स्थिरता लाने की नीति सीमित परिणाम दे रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसी नीतियां अपनाने का आग्रह किया जो अफगान जनता के हितों की रक्षा करें और सकारात्मक कदमों को प्रोत्साहित करें।
भारत का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अगस्त 2021 में तालिबान का काबुल पर नियंत्रण के बाद से वैश्विक समुदाय अब तक अफगानिस्तान को लेकर कोई स्पष्ट और सर्वसम्मत नीति तय नहीं कर पाया है।
रणनीतिक और सुरक्षा हितों से जुड़ा है भारत का दृष्टिकोण
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह पहल केवल मानवीय चिंता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे महत्वपूर्ण सामरिक और रणनीतिक कारण भी हैं। अफगानिस्तान मध्य और दक्षिण एशिया के बीच एक अहम भौगोलिक कड़ी है। भारत लंबे समय से वहां विकास परियोजनाओं, आधारभूत ढांचे और मानवीय सहायता कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति बनाए हुए है।
भारत का मानना है कि यदि अफगानिस्तान अंतरराष्ट्रीय अलगाव का शिकार होता है या वहां अस्थिरता बढ़ती है तो इसका लाभ आतंकवादी संगठनों और भारत विरोधी तत्वों को मिल सकता है। इसी कारण नई दिल्ली लगातार इस बात पर जोर देती रही है कि अफगान भूमि का उपयोग किसी भी आतंकवादी गतिविधि के लिए नहीं होना चाहिए।
तालिबान से व्यवहारिक संवाद की नीति
भारत ने अभी तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन व्यवहारिक कूटनीति के तहत काबुल में अपने राजनयिक मिशन को पुनः सक्रिय किया है। इसके अलावा अफगान प्रतिनिधिमंडलों का नई दिल्ली में स्वागत कर संवाद की प्रक्रिया भी जारी रखी गई है।
भारत का मानना है कि अफगानिस्तान को पूरी तरह अलग-थलग करने की नीति क्षेत्रीय स्थिरता के हित में नहीं होगी। इसलिए संवाद और सहयोग के माध्यम से वहां सकारात्मक बदलाव को प्रोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है।
पाकिस्तान के प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश
भारत की रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू क्षेत्रीय शक्ति संतुलन भी है। अफगानिस्तान में पाकिस्तान लंबे समय से अपना प्रभाव बनाए रखने का प्रयास करता रहा है। ऐसे में भारत का सक्रिय कूटनीतिक और मानवीय जुड़ाव क्षेत्रीय समीकरणों की दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
भारत ने यह भी संकेत दिया है कि अफगान प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि उसकी धरती का उपयोग भारत के खिलाफ किसी भी आतंकी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आश्वासन माना जा रहा है।
34 प्रांतों में चल रही हैं भारत की विकास परियोजनाएं
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने बताया कि उसकी सहायता योजनाएं अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों तक पहुंच रही हैं। 500 से अधिक विकास परियोजनाओं के माध्यम से भारत खाद्यान्न, दवाइयां, आपदा राहत सामग्री और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहा है।
इसके अलावा भारत ने एंबुलेंस उपलब्ध कराने, भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में आवास निर्माण और महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचों की मरम्मत में सहयोग का भी संकल्प लिया है। शिक्षा और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में भी भारत सक्रिय भूमिका निभा रहा है। छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से अफगान छात्रों को सहायता दी जा रही है, जबकि क्रिकेट और सांस्कृतिक संबंध दोनों देशों के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम बने हुए हैं।
व्यापार और संपर्क बढ़ाने पर जोर
भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ाने के प्रयास भी जारी हैं। भारत अफगानिस्तान के खनन क्षेत्र में निवेश और सहयोग की संभावनाएं तलाश रहा है। साथ ही वायु माल गलियारे के माध्यम से व्यापार को सुगम बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के लिए भारत चाबहार बंदरगाह का उपयोग कर रहा है, जिससे पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
पाकिस्तान के हवाई हमलों की निंदा
भारत ने अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हवाई हमलों की भी कड़ी आलोचना की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने इन्हें अफगानिस्तान की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया। भारत ने नागरिकों की मौत और लक्षित हत्याओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
भारत ने अफगानिस्तान में कार्यरत संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था कठिन परिस्थितियों में भी शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।
सकारात्मक जुड़ाव पर जोर
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि बहुपक्षीय संस्थाओं और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को सुविधा के अनुसार स्वीकार या अस्वीकार नहीं किया जा सकता। नई दिल्ली का मानना है कि अफगानिस्तान को पूरी तरह अलग-थलग करने से कट्टरपंथ, आतंकवाद और अस्थिरता को बढ़ावा मिल सकता है।
कुल मिलाकर भारत की वर्तमान अफगान नीति व्यवहारिक कूटनीति, मानवीय सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं का संतुलित मिश्रण दिखाई देती है। भारत सकारात्मक जुड़ाव, विकास सहयोग और रणनीतिक संवाद के माध्यम से अफगानिस्तान में स्थिरता को बढ़ावा देना चाहता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह नीति न केवल अफगान जनता के हित में है, बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और संतुलन बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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