
ऐतिहासिक सांस्कृतिक त्यौहार फूल वालों की सैर के आयोजन की इजाजत ना देना हमारी गंगा जमुनी संस्कृति पर कुठाराघात – देवेन्द्र यादव
वीना टंडन
नई दिल्ली,। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि 200 वर्ष से भी ज्यादा समय से हर वर्ष आयोजित होने वाले ‘‘फूल वालो की सैर’’ त्यौहार इस वर्ष राजधानी में आयोजित नही हुआ, क्योंकि भाजपा मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल जिन्हें राजधानी के बुनियादी ढ़ांचे को सुदृढ़ करने और दिल्ली में सौहार्द कायम करना चाहिए लेकिन इनकी संकुचित मानसिकता के चलते 2 नवम्बर को आयोजित होने वाले ऐतिहासिक त्यौहार फूल वालों की सैर के आयोजन की इजाजत नही दी गई। कार्यक्रम डीडीए और वन विभाग के प्रशासनिक पेच के बीच फस कर रह गया और आयोजकों को इसे रद्द करना पड़ा। ऐतिहासिक फूल वालों की सैर का आयोजन रद्द होने पर भाजपा नेता अथवा मुख्यमंत्री या कोई मंत्री तक कुछ कहने से बच रहे है।
देवेन्द्र यादव ने भाजपा सरकार पर सदियों पुराने त्योहार पर राजनीति करने का आरोप लगाया। जब सरकार के सामने वायु और जल प्रदूषण, टूटी हुई सड़कें, कचरा जमा होना और बिजली और पानी की कमी जैसी कई समस्याएं हैं, भाजपा अपनी बुनियादी जिम्मेदारी निभाने में असफल तो रही है लेकिन उनका सांस्कृतिक कार्यक्रमों बंद करना बेहद निराशाजनक है।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि हिन्दु-मुस्लमानों के बीच एकता की मिसाल रहे फूल वालों की सैर त्यौहार को बंद करने के पीछे कहीं इसका मुगलों से जुड़ा इतिहास तो नही, क्योंकि भाजपा शैक्षणिक पाठ्क्रम से मुगल काल के इतिहास और जानकारी को खत्म करने की कवायद कर रही है। उन्होंने कहा कि 1811 से शुरु हुए इस फूल वालों की सैर को इससे पहले भी अंग्रेजों ने इसे 1942 बंद कर दिया था, जिसे प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने 1962 में इसे फिर से शुरु किया। इसका आयोजन महरौली के जहाज महल आम बाग में मनाया जाता है और ख्वाजा बख्तियार काकी की दरगाह पर फूलों की चादर और योगमाया मंदिर में फूलों का पंखा और छत्र चढ़ाया जाता है।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि फूल वालों की सैर त्योहार सिर्फ एक उत्सव नही, बल्कि दिल्ली की मिली जुली संस्कृति और भाईचारे का एक जीता जागता प्रमाण है, जिसका इस वर्ष न होना निराशाजनक है। इस त्योहार में कुश्ती, कबड्डी, पेंटिंग जैसी प्रतियोगिताओं के अलावा फूल वालों का बाजार भी एक जगह समाहित होता था, जो इस वर्ष भाजपा सरकार की संकुचित सोच और प्रशासनिक दाव पेचों के कारण आयोजित नही हो सका।
देवेंद्र यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने त्योहार के आयोजन की पूर्ण अनुमति नहीं देकर हिंदुओं और मुसलमानों दोनों की भावनाओं को आहत किया है, और अगर रेखा गुप्ता सरकार सोचती है कि वह अपने संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए शहर के लोगों के एक वर्ग को प्रभावित कर सकती है, तो यह पूरी तरह से गलत था क्योंकि त्योहार को स्थगित करने के लिए जनता द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा समाज के सभी वर्गों में फैल गई थी।







