
सियासी झंडे की जंग में घिरा पालिका बाजार, 400 दुकानों के कारोबार पर संकट!
सेंट्रल पार्क में झंडा फहराने के ऐलान के बाद पुलिस अलर्ट, चप्पे-चप्पे पर पहरा; व्यापारियों की चिंता—प्रदर्शन की कीमत हम क्यों चुकाएं?
वीना टंडन
नई दिल्ली: कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में झंडा फहराने के सियासी ऐलान ने पालिका बाजार की हलचल बढ़ा दी है। संभावित प्रदर्शन और कार्यकर्ताओं के जुटने की अपील के बीच दिल्ली पुलिस ने बाजार के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। सैकड़ों पुलिसकर्मियों की तैनाती और सुरक्षा घेरे के बीच अब व्यापारियों को कारोबार की चिंता सताने लगी है। उनका सवाल साफ है—सियासी गतिविधियों के बीच छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट क्यों आए?
झंडारोहण के ऐलान से बढ़ी हलचल, पुलिस ने संभाला मोर्चा
दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दीपिका ने पालिका बाजार के सेंट्रल पार्क में झंडा फहराने का ऐलान किया। इसके बाद आम आदमी पार्टी की ओर से भी कार्यक्रम के समर्थन में कार्यकर्ताओं और आम लोगों से पहुंचने की अपील की गई। इसके बाद संभावित भीड़ और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा इंतजाम बढ़ा दिए।
पालिका बाजार के आसपास पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। सुरक्षा व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई बल की मौजूदगी के बीच इलाके की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन इस सख्ती के बीच बाजार आने वाले ग्राहकों और दुकानदारों की मुश्किलें भी चर्चा में हैं।
तीन एकड़ में फैला बाजार, करीब 400 दुकानों की चिंता
साल 1978 में स्थापित पालिका बाजार दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में शामिल है। करीब तीन एकड़ में फैले इस भूमिगत वातानुकूलित बाजार में लगभग 400 दुकानें हैं। यहां बड़ी संख्या में छोटे व्यापारी अपने कारोबार के जरिए आजीविका चलाते हैं।
बाजार की कमाई काफी हद तक ग्राहकों की आवाजाही पर निर्भर करती है। दिल्ली और आसपास के इलाकों से लोग खरीदारी के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसे में बाजार के प्रवेश द्वारों और आसपास सुरक्षा बढ़ने से व्यापारियों को आशंका है कि ग्राहक आने से कतराएंगे तो बिक्री प्रभावित हो सकती है।
दुकानदारों की चिंता यह है कि यदि भीड़, सुरक्षा जांच या संभावित अव्यवस्था के कारण बाजार तक पहुंचना मुश्किल हुआ, तो इसका सीधा असर उनकी रोजाना की कमाई पर पड़ेगा।
महासचिव विनय कुमार ठाकुर बोले—ग्राहक नहीं आएंगे तो कारोबार कैसे चलेगा?
पालिका बाजार शॉपकीपर वेलफेयर एसोसिएशन (रजि.)के महासचिव विनय कुमार ठाकुर ने मौजूदा हालात पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि बाजार के सभी प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है। झंडारोहण कार्यक्रमों और प्रदर्शनों के दौरान ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
ठाकुर के मुताबिक, बाजार में करीब 400 दुकानें हैं और यहां बड़ी संख्या में छोटे व्यापारी अपने परिवारों की आजीविका के लिए कारोबार करते हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था के कारण ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
व्यापारियों की मांग है कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ बाजार में ग्राहकों की आवाजाही सुचारु बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि राजनीतिक गतिविधियों का असर उनके कारोबार पर कम से कम पड़े।
सुरक्षा भी जरूरी, लेकिन दुकानदारों की रोजी-रोटी का क्या?
पालिका बाजार शॉपकीपर वेलफेयर एसोसिएशन (रजि.) के सचिव जितेंद्र गर्ग ने कहा कि किसी भी संभावित प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है। वहीं, व्यापारियों के लिए बाजार तक ग्राहकों की आसान पहुंच भी बेहद जरूरी है। ऐसे में चुनौती यह है कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रहे और आम लोगों को खरीदारी करने में अनावश्यक परेशानी न हो।
फिलहाल पालिका बाजार में सुरक्षा इंतजाम कड़े हैं और व्यापारियों की निगाहें ग्राहकों की आवाजाही पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान पुलिस सुरक्षा और बाजार के कारोबार के बीच किस तरह संतुलन कायम करती है।
व्यापारियों का सवाल यही है—सियासी लड़ाई किसी की भी हो, नुकसान छोटे दुकानदारों का क्यों हो?




