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दिल्ली में बदले फायर सेफ्टी नियम, अब इमारतों में 18 सुरक्षा इंतजाम जरूरी

वीना टंडन
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में इमारतों की फायर सेफ्टी व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने दिल्ली अग्निशमन सेवा (संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। नए नियमों में इमारत की ऊंचाई और उसके इस्तेमाल के आधार पर न्यूनतम अग्नि सुरक्षा मानक तय किए गए हैं। मकसद साफ है—आग लगने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित निकालने और दमकल की टीम को जल्द मौके तक पहुंचाने में किसी तरह की बाधा न आए।

दमकल की गाड़ी के लिए 6 मीटर का रास्ता जरूरी

नए प्रावधानों के तहत संबंधित इमारत या परिसर तक फायर ब्रिगेड की गाड़ियों की निर्बाध पहुंच के लिए कम से कम छह मीटर चौड़ा रास्ता रखना होगा। इसके अलावा आग और धुएं को फैलने से रोकने के लिए फायर और स्मोक बैरियर, सुरक्षित फायर एग्जिट और जरूरत के मुताबिक प्रेशराइज्ड सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं भी जरूरी होंगी।

अलार्म से लेकर इमरजेंसी बिजली तक इंतजाम

नए नियमों में कुल 18 तरह के न्यूनतम फायर सेफ्टी इंतजाम शामिल किए गए हैं। इनमें फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम, स्वचालित निगरानी व्यवस्था, इमरजेंसी बिजली की व्यवस्था, फायर कंट्रोल रूम और आग बुझाने के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता शामिल है।

इमारतों में इंटरनल हाइड्रेंट, वेट राइजर, डाउन-कॉमर, यार्ड हाइड्रेंट और रिंग मेन जैसी व्यवस्थाओं के साथ फायर पंप हाउस और दमकलकर्मियों के लिए सुरक्षित पहुंच का भी प्रावधान किया गया है।

निरीक्षण में भी आएगी पारदर्शिता

सरकार ने फायर सेफ्टी मानकों को संशोधित यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज (UBBL) से जोड़ा है। साथ ही निरीक्षण प्रक्रिया को एक समान बनाने के लिए मानकीकृत ऑडिटर चेकलिस्ट लागू करने की बात कही गई है। इससे इमारतों में सुरक्षा संबंधी कमियों की पहचान और उनके अनुपालन की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेगी।

नए नियम संशोधित UBBL की अधिसूचना जारी होने के साथ प्रभावी होंगे। हालांकि, उससे पहले जमा किए गए लंबित आवेदनों पर आवेदन जमा करने के समय लागू नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी।

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