
आस्था पर वार! राममंदिर चढ़ावा चोरी कांड में 2 करोड़ बरामद, ट्रस्ट के 40 कर्मचारियों से पूछताछ
अयोध्या/स्टार न्यूज़ टेलीविजन ब्यूरो
देश की करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र राममंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी कांड की जांच अब बड़े खुलासों की ओर बढ़ती नजर आ रही है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई के दौरान अब तक करीब 2 करोड़ रुपये की रकम बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस घटनाक्रम ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था बल्कि मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) अब तक मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लगभग 40 कर्मचारियों से गहन पूछताछ कर चुकी है। पूछताछ में सामने आए तथ्यों ने जांच एजेंसियों का ध्यान संभावित अंदरूनी मिलीभगत की ओर भी आकर्षित किया है। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक किसी निष्कर्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
सीसीटीवी फुटेज और वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही एसआईटी
जांच टीम मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, डिजिटल लेन-देन के दस्तावेज और कैश मैनेजमेंट सिस्टम की बारीकी से जांच कर रही है। अधिकारियों का प्रयास यह पता लगाने का है कि इतनी बड़ी राशि किस प्रकार गायब हुई और इस पूरे घटनाक्रम में किन लोगों की भूमिका रही।
सूत्रों का दावा है कि जांच के दौरान कुछ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और कुछ कर्मचारियों की गतिविधियों में असामान्य पैटर्न सामने आए हैं। इन्हीं आधारों पर जांच एजेंसियां आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
ट्रस्ट के वित्तीय सिस्टम का हो सकता है ऑडिट
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और चढ़ावा संग्रह प्रणाली का विशेष ऑडिट कराने पर भी विचार किया जा रहा है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान की सुरक्षा और पारदर्शिता पर किसी प्रकार का प्रश्नचिह्न न लगे।
श्रद्धालुओं में रोष, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
राममंदिर में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं तथा श्रद्धापूर्वक दान-चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में इस तरह की घटना ने लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान के नाम पर चढ़ाए गए धन में यदि किसी प्रकार की हेराफेरी हुई है तो यह केवल कानूनी अपराध नहीं बल्कि आस्था के साथ विश्वासघात भी है।
जनता की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो तथा जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
फिलहाल एसआईटी की जांच निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। पूरे देश की नजर अब इस बात पर टिकी है कि चढ़ावा चोरी कांड के पीछे आखिर कौन-कौन चेहरे बेनकाब होते हैं और क्या यह कुछ व्यक्तियों की करतूत थी या फिर किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा।







