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स्क्रैप बनेगा भारतीय इस्पात उद्योग की मजबूती का आधार: एमजंक्शन स्टील कॉन्फ्रेंस

मुख्य संवाददाता

नई दिल्ली, 8 जुलाई। भारतीय इस्पात उद्योग को अधिक टिकाऊ, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार बनाने में स्क्रैप (कबाड़ इस्पात) की भूमिका सबसे अहम होगी। यह बात एमजंक्शन द्वारा आयोजित दो दिवसीय 13वें इंडियन स्टील मार्केट्स कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में उद्योग जगत के प्रमुख विशेषज्ञों ने कही।

सेल (SAIL) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. अशोक कुमार पांडा ने कहा कि इस्पात उद्योग में कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन के लिए स्क्रैप का उपयोग सबसे प्रभावी विकल्प बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि जो स्क्रैप कभी बेकार समझा जाता था, आज वही सबसे मूल्यवान कच्चा माल बन गया है।

एमजंक्शन के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय वर्मा ने कहा कि स्क्रैप अब केवल अपशिष्ट नहीं, बल्कि भविष्य के इस्पात का आधार है। भारत में इस्पात की बढ़ती मांग को देखते हुए स्क्रैप रणनीतिक कच्चे माल के रूप में उभर रहा है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और देश का विनिर्माण तंत्र मजबूत होगा।

टाटा स्टील के मार्केटिंग एवं सेल्स उपाध्यक्ष आशीष अनुपम ने कहा कि इस्पात क्षेत्र के डीकार्बोनाइजेशन के लिए कोई एक समाधान पर्याप्त नहीं है। हाइड्रोजन, कार्बन कैप्चर, इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस और स्क्रैप जैसे सभी विकल्पों पर मिलकर काम करना होगा।

वहीं मैकिंजी एंड कंपनी के वरिष्ठ भागीदार रजत गुप्ता ने कहा कि भारत में इस्पात उत्पादन और खपत तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उद्योग को भू-राजनीतिक जोखिमों से सुरक्षित और लागत के लिहाज से प्रतिस्पर्धी बनाना भी उतना ही आवश्यक है।

इस वर्ष सम्मेलन की थीम ‘स्टीलाथॉन–शेपिंग द स्टील-टू-स्क्रैप वैल्यू चेन’ रखी गई है। भारत वर्ष 2030 तक 30 करोड़ टन इस्पात उत्पादन क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में बढ़ रहा है, जिसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले स्क्रैप की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी।

एमजंक्शन ने पिछले वित्त वर्ष में देशभर के इस्पात संयंत्रों को लगभग 25 लाख टन स्क्रैप उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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