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48 डिग्री तापमान से झुलस रहे यूपी के इस जिले में बृच्छारोपण के नाम पर करोड़ों का गोलमाल!

स्टार न्यूज़ टेलिविजन

राकेश पाण्डेय

लखनऊ:यूपी का बांदा जिस भीषण गर्मी से झुलस रहा है यूपी में सबसे अधिक तापमान यहां लगातार रिकॉर्ड हो रहा है जबकि इस जिले में बृच्छारोपण में हुई लूट को जिम्मेदार बताया जा रहा है ।

मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय संगठन बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए एस नोमानी सहित संगठन के पदाधिकारियों ने जिला अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन ने कहा गया है कि बुंदेलखंड के बाँदा जिले में रिकॉर्डतोड़ भीषण गर्मी (48°C), लगातार गिरते भूजल स्तर और वृक्षों की अंधाधुंध अवैध कटाई एवं मात्र कागजी तौर पर हो रहे वृक्षारोपण के कारण उत्पन्न हुए ‘पर्यावरण आपातकाल’ व अवैध खनन के संबंध में ध्यानाकर्षण एवं तत्काल राहत उपायों की मांग की हैं!
आगे ए एस नोमानी ने इस ज्ञापन के माध्यम से यह भी कहा है कि जनपद बाँदा की उस भयावह जमीनी हकीकत की ओर आकर्षित करना चाहते हैं, जिससे आज यहाँ का हर आम नागरिक, किसान, मजदूर और मूक पशु-पक्षी त्रस्त हैं।

वर्तमान में बाँदा का तापमान 47°c से 48°c के बीच झुलस रहा है। यह केवल एक प्राकृतिक मौसम नहीं है, बल्कि इंसानी लापरवाही और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये के कारण पैदा हुआ एक गंभीर पर्यावरण संकट है।

तापमान 47°c से 48°c को देखते हुये इस बात का जीता-जागता और कड़वा सबूत है, कि अगर आज हम नहीं संभले, तो आने वाले दिनों में जनपद वासियों को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन भी नसीब नहीं होगी। इस भीषण संकट को देखते हुए हम निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर प्रशासन से तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं।

1. वृक्षों की अवैध कटाई पर तत्काल रोक और ‘हरित पट्टी’ का निर्माण: विकास और निजी स्वार्थ के नाम पर लगातार हरे पेड़ काटे जा रहें हैं। बिना प्रशासन की मिलीभगत के यह संभव नहीं है। पेड़ों के अवैध कटान पर वन विभाग के दोषी अधिकारियों को तत्काल निलम्बित कर रासुका जैसी सख्त कार्रवाई हो और आगामी वर्षा ऋतु में व्यापक स्तर पर जन-भागीदारी के साथ उच्चाधिकारियों के संरक्षण में वृक्षारोपण अभियान चलाया जाए। ताकि विभागीय अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार न किया जा सके।

2. अवैध बालू खनन और जलस्रोतों का विनाश: हमारी जीवनदायिनी केन नदी समेत अन्य जलस्रोतों से भारी मशीनों द्वारा किए जा रहें ,अवैध बालू खनन ने पर्यावरण का संतुलन पूरी तरह बिगाड़ दिया है। जलस्तर पाताल में चला गया है। इस पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।

3. भीषण गर्मी से आम जनमानस को राहत: शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रमुख चौराहों (जैसे अशोक लाट तिराहा एवं अन्य व्यस्त मार्ग) पर आम राहगीरों, रिक्शा/ई-रिक्शा चालकों और मजदूरों के लिए तत्काल शेड (छायादार व्यवस्था), ठंडे पानी के प्याऊ और ओआरएस काउंटर स्थापित किए जाएं।

4. बिजली और पानी की सुचारू आपूर्ति: इस 46°c की जानलेवा गर्मी में अघोषित बिजली कटौती और पीने के पानी की किल्लत आग में घी का काम कर रही है। जल संस्थान और विद्युत विभाग को निर्देशित कर चौबीसों घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए।

5. पर्यावरण संरक्षण जन-आंदोलन की शुरुआत: प्रशासन केवल कागजी आंकड़े न दिखाए, बल्कि जमीनी स्तर पर पर्यावरण समितियों को सक्रिय करे और अवैध खनन व प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाए।
‘आज अगर हम पेड़ों और नदियों को नहीं बचाएंगे, तो कल हमारा अस्तित्व भी नहीं बचेगा।

यह ज्ञापन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि बाँदा के भविष्य की चीख है।’

अतः बुन्देलखण्ड इंसाफ सेना जनहित में आपसे मांग करती है, कि जनपद-बाँदा की गम्भीर स्थिति और इस ज्ञापन की भावना को समझते हुए उपरोक्त मांगों पर तत्काल प्रभाव से धरातल पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। यदि जनहित और पर्यावरण हित से जुड़े इन बुनियादी मुद्दों पर त्वरित कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र की जनता और सामाजिक कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर उग्र ‘जन आंदोलन’ के लिए बाध्य होंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

इस मौके पर समाजसेवी घासीराम निषाद, प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल वर्मा, अकील खान, छोटा वर्मा।

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