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जमीयत उलेमा गुजरात द्वारा संभल हादसे के शहीदों के परिवारों को रमजान से पहले आर्थिक सहायता
कोई भी व्यवस्था, कानून और न्याय को कुचलकर स्थिर नहीं रह सकती – मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी
मुख्य संवाददाता
संभल, 27 फरवरी: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में जमीयत उलेमा गुजरात के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज संभल हादसे के शहीदों के परिवारों से मुलाकात की और उनके प्रति एकजुटता प्रकट करते हुए प्रत्येक परिवार को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। इस पहल का उद्देश्य रमजान से पहले प्रभावित परिवारों की सहायता करना और उनके साथ खड़े होने का वास्तविक प्रदर्शन करना है।
प्रतिनिधिमंडल में जमीयत उलेमा गुजरात के उपाध्यक्ष मौलाना अब्दुल कुद्दूस पालनपुरी, मौलाना अबुल हसन सिवानी (पालनपुर), मौलाना नदीम अहमद बदरखा और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल थे। इस अवसर पर जमीयत उलेमा संभल के अध्यक्ष हाफिज मोहम्मद शाहिद, महासचिव मौलाना नदीम अख्तर कासमी और स्थानीय पदाधिकारी भी उपस्थित थे।
गौरतलब है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के विशेष निर्देश पर, घटना के कुछ ही दिनों बाद केंद्रीय कार्यालय की ओर से प्रत्येक शहीद के परिवार को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता पहले ही प्रदान की जा चुकी है। जमीयत निरंतर पीड़ितों के संपर्क में है और उनकी हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत है।
इस मौके पर मौलाना अब्दुल कुद्दूस पालनपुरी ने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी की विशेष ध्यानाकर्षण के बाद जमीयत उलेमा गुजरात यहां अपने भाइयों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने आई है। हमने हमेशा ही पीड़ितों और जरूरतमंदों के साथ खड़े रहने का संकल्प लिया है और आगे भी अपने धार्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्यों को निभाते रहेंगे।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने कहा कि जमीयत शुरुआत से ही संभल हादसे के पीड़ितों के साथ खड़ी है। हमारी राहत गतिविधियों का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि शहीदों के परिवारों के साथ एकजुटता प्रकट करना और उनके दुख में सहभागी बनना है। उन्होंने आगे कहा कि कोई भी व्यवस्था, कानून और न्याय को कुचलकर स्थिर नहीं रह सकती। हम संभल हादसे के पीड़ितों के साथ हर हाल में खड़े रहेंगे और यह सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे कि पीड़ितों को न्याय मिले और उनकी आवाज बुलंद हो।