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वंदे मातरम् पर सियासी संग्राम तेज, कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने

वीना टंडन
नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में हुए कार्यक्रम के दौरान गीत के गायन को लेकर सामने आए वीडियो और उसके बाद हुई बयानबाजी ने विवाद को और हवा दे दी है। भाजपा ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं पर राष्ट्रगीत के अपमान का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ‘वंदे मातरम्’ के प्रति पार्टी का पूरा सम्मान है।

कांग्रेस मुख्यालय के वीडियो से शुरू हुआ विवाद

15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद ‘वंदे मातरम्’ का गायन हुआ। इसी दौरान सामने आए एक वीडियो में सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच बातचीत और इशारे दिखाई दिए। भाजपा ने इसे गीत रोकने की कोशिश बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। मामला राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर शिकायतों तक भी पहुंच गया है।

भाजपा नेताओं का आरोप है कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा ऐतिहासिक प्रतीक है। इसी आधार पर भाजपा नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि पार्टी ने वोट बैंक की राजनीति के चलते राष्ट्रगीत की उपेक्षा की।

कांग्रेस बोली- गीत रोकने का आरोप गलत

कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी की ओर से सफाई दी गई कि सोनिया गांधी का इशारा ‘वंदे मातरम्’ रोकने से संबंधित नहीं था। कांग्रेस के अनुसार, उस समय खरगे काफी देर से खड़े थे और सोनिया गांधी उनके लिए कुर्सी की व्यवस्था कराने की बात कर रही थीं। पार्टी ने कहा कि इस घटनाक्रम को राष्ट्रगीत के अपमान से जोड़ना गलत है।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि पार्टी ‘वंदे मातरम्’ का सम्मान करती है और राष्ट्रभक्ति के सवाल पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। कांग्रेस ने भाजपा पर राजनीतिक लाभ के लिए एक कार्यक्रम के वीडियो को मुद्दा बनाने का आरोप लगाया है।

1937 के प्रस्ताव का भी आया जिक्र

विवाद के बीच कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर पार्टी के पुराने रुख पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस ने 1937 के प्रस्ताव के अनुरूप गीत के शुरुआती दो पदों को गाने की बात दोहराई है। पार्टी का कहना है कि यह रुख ऐतिहासिक निर्णय और सभी समुदायों की भावनाओं के सम्मान से जुड़ा है।

दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के इस रुख को भी निशाने पर लिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि राष्ट्रीय गीत के साथ किसी भी प्रकार का विभाजन स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस मुद्दे ने अब संसद से लेकर राज्यों की राजनीति तक नया सियासी मोर्चा खोल दिया है।

वंदे मातरम् पर बढ़ती बयानबाजी ने एक बार फिर देश की राजनीति में राष्ट्रवाद, इतिहास और सामाजिक समावेशन से जुड़े सवालों को केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर टकराव और तेज होने के आसार हैं।

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