
दिल्ली में हर साल बढ़ सकता है टोल टैक्स, एमसीडी सदन से प्रस्ताव को मिली मंजूरी
वीना टंडन
नई दिल्ली। राजधानी में प्रवेश करने वाली व्यावसायिक गाड़ियों के लिए आने वाले समय में टोल टैक्स महंगा हो सकता है। नगर निगम (एमसीडी) ने ऐसा प्रस्ताव पारित किया है, जिसके लागू होने के बाद टोल टैक्स में हर वर्ष स्वतः 5 प्रतिशत तक वृद्धि का रास्ता साफ हो सकता है। हालांकि इसके लिए अभी दिल्ली सरकार की मंजूरी और अधिसूचना जारी होना बाकी है।
सूत्रों के अनुसार दिल्ली नगर निगम (टोल टैक्स) बायलॉज, 2007 में संशोधन का प्रस्ताव निगम सदन की बैठक में पारित किया गया। यदि दिल्ली सरकार इस संशोधन को मंजूरी देकर अधिसूचित कर देती है तो भविष्य में हर साल टोल दरों में 5 प्रतिशत की स्वचालित बढ़ोतरी संभव होगी।
भारी ट्रकों के लिए नई श्रेणी प्रस्तावित
प्रस्ताव में 7 एक्सल और उससे अधिक क्षमता वाले ट्रकों के लिए एक नई श्रेणी बनाने का भी प्रावधान किया गया है। इस श्रेणी के वाहनों को दिल्ली में प्रत्येक प्रवेश पर 2,000 रुपये टोल टैक्स देना होगा। इसके अलावा ऐसे वाहनों के लिए 60,000 रुपये का मासिक पास भी उपलब्ध कराया जाएगा।
प्रस्तावित टोल दरें
दिल्ली सीमा में प्रवेश करने वाले व्यावसायिक वाहनों के लिए प्रस्तावित टोल शुल्क इस प्रकार होगा—
– टैक्सी और टेम्पो : 100 रुपये
– बस और कैंटर : 200 रुपये
– 6 पहिया (2 एक्सल) ट्रक : 400 रुपये
– 10 पहिया (3 एक्सल) ट्रक : 800 रुपये
– 4 से 6 एक्सल वाले बड़े ट्रक : 2,000 रुपये
अक्टूबर तक 20 टोल प्लाजा होंगे बैरियर-फ्री
एमसीडी राजधानी में टोल वसूली व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है। नए मल्टी-लेन फ्री-फ्लो सिस्टम के तहत टोल प्लाजाओं पर लगे बैरियर हटाए जाएंगे और डिजिटल तकनीक के माध्यम से वाहनों से टोल वसूला जाएगा।
इस परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। योजना के अनुसार अक्टूबर 2026 तक दिल्ली के 20 बॉर्डर टोल प्लाजा बैरियर-फ्री कर दिए जाएंगे, जबकि दिसंबर 2026 तक सभी टोल पॉइंट्स पर नई व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रदूषण नियंत्रण और यातायात प्रबंधन पर फोकस
एमसीडी अधिकारियों का कहना है कि टोल टैक्स की नई व्यवस्था और फ्री-फ्लो सिस्टम सुप्रीम कोर्ट तथा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (AQMC) के निर्देशों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। इससे टोल प्लाजाओं पर लगने वाले जाम में कमी आएगी, वाहनों का समय बचेगा और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।
यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो दिल्ली में प्रवेश करने वाले लाखों व्यावसायिक वाहन चालकों और परिवहन कारोबारियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।






