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भारत-ओमान CEPA से खुलेगा व्यापार का नया अध्याय, खाद सुरक्षा को भी मिलेगा सहारा

वीना टंडन
नई दिल्ली। भारत और ओमान के बीच लागू हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) से भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलने जा रहा है। इस समझौते के तहत भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को ओमान के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।

वहीं पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा एवं उर्वरक आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच ओमान ने भारत को अतिरिक्त उर्वरक और पेट्रोकेमिकल्स उपलब्ध कराने की पेशकश की है। ओमान के विदेश व्यापार सलाहकार पंकज खिमजी ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर ओमान-इंडिया फर्टिलाइज़र प्रोजेक्ट (OMIFCO) में ओमान के हिस्से का उत्पादन भी भारत की ओर मोड़ा जा सकता है।

उर्वरक आपूर्ति पर युद्ध का असर

कच्चे तेल के अलावा ईरान युद्ध का असर उर्वरक आपूर्ति पर भी दिखाई दे रहा है। भारत अपने यूरिया आयात का लगभग 20 से 30 प्रतिशत और एलएनजी आयात का करीब 50 प्रतिशत खाड़ी देशों से प्राप्त करता है। एलएनजी नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों के उत्पादन का प्रमुख ईंधन है।

हालांकि भारत ने स्थिति को देखते हुए रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन, कनाडा, अल्जीरिया, मिस्र और टोगो जैसे देशों से उर्वरकों की खरीद बढ़ाकर आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाई है।

ओमान बना भरोसेमंद साझेदार

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने ओमान से 7.2 अरब डॉलर का आयात किया, जिसमें 1.6 अरब डॉलर का कच्चा तेल, 1.2 अरब डॉलर की एलएनजी और 84.3 करोड़ डॉलर के उर्वरक शामिल रहे। वहीं भारत का ओमान को निर्यात लगभग 4 अरब डॉलर रहा।

भारत और ओमान के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 11.18 अरब डॉलर पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष में 10.61 अरब डॉलर था। विशेषज्ञों का मानना है कि CEPA लागू होने के बाद यह व्यापार और तेज गति से बढ़ेगा।

खाड़ी और अफ्रीका के बाजारों तक पहुंच

यूएई के बाद किसी खाड़ी देश के साथ भारत का यह दूसरा बड़ा व्यापार समझौता है। ओमान अपने आधुनिक बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के कारण खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और पूर्वी अफ्रीका के बाजारों तक पहुंच का रणनीतिक द्वार माना जाता है।

खरीफ सीजन के लिए खाद का पर्याप्त भंडार

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने खरीफ-2026 के लिए उर्वरकों की आवश्यकता का पुनर्मूल्यांकन किया है। यूरिया की आवश्यकता 194.02 लाख मीट्रिक टन से घटाकर 190.32 लाख मीट्रिक टन तथा डीएपी की जरूरत 59.17 लाख मीट्रिक टन से घटाकर 56.23 लाख मीट्रिक टन कर दी गई है।

सरकार के अनुसार खरीफ 2026 के लिए कुल उर्वरक आवश्यकता 383.9 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है। 1 जून तक देश में लगभग 199.86 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडार उपलब्ध था, जो सामान्य स्तर से काफी अधिक है।

उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा शर्मा ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के अलावा वैकल्पिक मार्गों से 25 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 15 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 10 लाख मीट्रिक टन एनपीके उर्वरकों की व्यवस्था की जा चुकी है। इनके जून-जुलाई में देश पहुंचने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत आयात और घरेलू उत्पादन के माध्यम से 132.43 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित कर चुका है।

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